उत्तर प्रदेश

भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा बिजनौर के जिला अध्यक्ष इरशाद अहमद ने मुरादाबाद पुलिस प्रशासन डॉक्टर्स पर हुए कातिलाना हमले की कड़े शब्दों में निंदा की

भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा बिजनौर के जिला अध्यक्ष इरशाद अहमद ने प्रेस को जारी एक विज्ञप्ति में मुरादाबाद पुलिस प्रशासन डॉक्टर्स पर हुए कातिलाना हमले की कड़े शब्दों में निंदा की
इरशाद अहमद ने कहा आज दुनिया के साथ साथ हमारा पूरा भारत लॉक डाउन है देश की जनता सहमी हुई है हवाई सेवा बस ट्रेन ट्रांसपोर्ट सब बंद है स्कूल कॉलेज मार्केट मॉल्स सरकारी ऑफिस प्राइवेट ऑफिस सब पर सन्नाटा छाया हुआ है सोयो करोड़ का रोज सरकार को नुकसान हो रहा है हर चेहरे पर मायूसी है डॉक्टर्स पुलिस प्रशासन सफाई कर्मचारी रात दिन मेहनत कर एक बड़ी तबाही को रोकने का प्रयास कर रहे हैं लोग इन्हें फरिश्ता बताकर फूल मालाओं से स्वागत कर रहे हैं और इन्हें दुआओं से नवाज़ रहे हैं लेकिन कुछ जाहिल लोग ऐसे हैं जो इन पर लाठी-डंडे पत्थर बरसा रहे हैं जो कि मानवता के बिलकुल खिलाफ है ऐसे लोग इंसान कहलाने लायक नहीं होते है इन्हें आप मुस्लिम तो कह सकते हो पर इनकी संख्या मुस्लिमों में पांच परसेंट के करीब है यह जाहिल लोग 95 परसेंट मुस्लिमों का सर का दर्द बने हुए हैं अच्छे मुस्लिमों की गलती यह है की वह लोग आपस में चर्चा करके इस तरह की घटना को गलत तो बताते हैं पर इन लोगों का विरोध नहीं करते जिसकी वजह से सभी मुस्लिम समाज लपेटे में आ जाता है इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सारे मुस्लिमों पर उंगली उठाती है और हिंदू मुस्लिम डिबेट टीवी पर चलाकर दोनों हिंदू मुसलमान भाइयों के बीच में खाई को गहरा करती जा रही है मैं उन बुद्धिजीवी नौजवान मुसलमान भाइयों से अपील करता हूं आप लोग अखबार के माध्यम से फेसबुक व्हाट्सएप के माध्यम से इन लोगों का विरोध करें चुप रह कर इनका हौसला ना बढ़ाए

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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