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कहीं Instagram पर आपकी पोस्ट ब्लॉक तो नहीं?

Instagram New Feature: इंस्टाग्राम एक फोटो और वीडियो-शेयरिंग सोशल नेटवर्किंग ऐप है. इसके दुनियाभर में ढेरों यूजर्स हैं. इंस्टाग्राम अब अपने यूजर्स को बताएगा कि उनकी पोस्ट को अन्य यूजर्स के रिकमेंडेशन में ब्लॉक तो नहीं किया गया है. इस बात की जानकारी खुद इंस्टाग्राम के हेड ने दी है. उन्होंने कहा कि अगर ऐप में यूजर्स की पोस्ट को ब्लॉक किया गया है तो वो इसकी जांच कर सकेंगे. इसके साथ ही अन्य यूजर्स को यह सुविधा दी जाएगी कि वो किसी पार्टिकुलर पोस्ट को लोगों तक न पहुंचने की अपील कर सकें.

पोस्ट रिकमेंडेशन का देख सकेंगे स्टेटस

इंस्टाग्राम हेड एडम मोसेरी ने एक ट्वीट किया है. इस ट्वीट के अनुसार, फोटो और वीडियो-शेयरिंग सर्विस पर बिजनेस अकाउंट्स अब जांच कर सकते हैं कि उनके किसी पोस्ट को उन यूजर्स के लिए रिकमेंड किया गया है या नहीं, जो उन्हे फॉलो नहीं करते हैं. पोस्ट रिकमेंडेशन का स्टेटस देखने के लिए आप अकाउंट में जाकर अकाउंट स्टेटस पर क्लिक कर सकते हैं. यहां आपको डिटेल्स दिख जाएंगी. बता दें, इंस्टाग्राम एक्सप्लोर पेज और होम फीड जैसी जगहों पर यूजर्स की रिकमेंडेशन वाली पोस्ट दिखाता है. यहां पर उन अकाउंट्स की पोस्ट शो होती हैं, जिन्हे आप फॉलो नहीं करते हैं.

 

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प्लेटफार्म की कम्युनिटी गाइडलाइंस का करना होगा पालन

मेटा की योजना है कि वो साल के अंत तक रिकमेंडेशन वाले कंटेंट को दो गुना कर देगी. इसके लिए मेटा ने कहा है कि अगर यूजर्स अपनी पोस्ट को रिकमेंड कराना चाहते हैं तो उन्हें प्लेटफार्म की कम्युनिटी गाइडलाइंस और नियमों का पालन करना होगा. उदाहरण के लिए, इंस्टाग्राम यूजर्स को को हिंसा दिखाने वाले कंटेंट को पोस्ट करने की अनुमति तो देगा, लेकिन उस पोस्ट को अन्य यूजर्स को रिकमेंड नहीं किया जाएगा. इससे पोस्ट की पहुंच कम हो जाएगी. हालांकि यूजर्स ब्लॉक पोस्ट के लिए अपील भी कर सकेंगे.

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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