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इंस्टाग्राम पिक्चर क्लिक करने के लिए कराएगा रिमाइंड, Candid Stories फीचर इस तरह करेगा काम

Instagram Candid Stories Feature: मेटा के स्वामित्व वाला फोटो शेयरिंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम अपने यूजर्स के किए नए फीचर पेश करने जा रहा है. इन नए फीचर्स में इंस्टाग्राम नोट्स, कैंडिडेट स्टोरीज और ग्रुप प्रोफाइल शामिल हैं. इंस्टाग्राम ने कहा है कि नए फीचर यूजर्स को फोटो और वीडियो के अलावा अन्य फॉर्मेट का इस्तेमाल करके प्लेटफॉर्म पर अपने दोस्तों और परिवार से जुड़े रहने में मदद करेंगे. इससे यूजर्स का एक्सपीरियंस बेहतर होगा. आज की इस खबर में इस बारे में डिटेल में बात करते हुए हम आपको बताने जा रहे हैं कि इंस्टाग्राम ने क्या प्रमुख घोषणाएं की हैं.

नोट्स फीचर

इंस्टाग्राम ने कुछ समय पहले नोट्स फीचर को ऑफिशियली रोल आउट किया था. इस फीचर के तहत यूजर्स टेक्स्ट (60 अक्षरों तक) और इमोजी के रूप में अपने विचार साझा कर सकते हैं. इसके लिए आपको बस इनबॉक्स में जाना है, ऑडियंस को चुनना है, और पोस्ट कर देना है.  स्टोरीज़ की तरह, नोट्स भी 24 घंटे के बाद गायब हो जाते हैं. नोट्स इनबॉक्स में सबसे ऊपर दिखाई देते हैं. ऑडियंस इन नोट्स का जवाब दे सकती है.

कैंडिड स्टोरीज

इंस्टाग्राम ने ट्वीट कर बताया है कि वह कैंडिड स्टोरीज नाम के एक नए फीचर की टेस्टिंग कर रहा है. यह फीचर यूजर्स को बताएगा कि वे इस समय जो कर रहे हैं, उसकी एक तस्वीर लें. ब्लॉग पोस्ट के मुताबिक, कैडिड स्टोरी का रिमाइंडर सिर्फ उन लोगो को मिलेगा जो अपनी स्टोरी शेयर करना चाहते हैं. जो लोग नहीं चाहते हैं, उन्हे यह रिमाइंडर नहीं मिलेगा. इसके लिए आप सेटिंग में जाकर ऑन या ऑफ भी चुन सकेंगे  ये फीचर जल्द ही फेसबुक के लिए भी रोल आउट किया जाएगा.

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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