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सूरत और मुम्बई में खाने की समस्या को लेकर लोग सडकों पर उतर आए ..क्या भूख कोरोना पर भारी पड रही है?

राजेश तिवारी विशेष संवाददाता

  • बांद्रा स्टेशन पर जुटे मजदूरों ने पुलिस से कहा- हमें अपने गांव जाने दो; महाराष्ट्र सरकार ने कहा- इनके खाने का इंतजाम हम करेंगे
  • सूरत के वराछा इलाके में मजदूरों का प्रदर्शन, कहा- हमें खाना नहीं मिल पा रहा, सरकार हमें अपने गांवों तक पहुंचाने के इंतजाम करे

मुंबई/सूरत. देश में लॉकडाउन 3 मई तक बढ़ा दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इसका ऐलान किया और लोगों से अपील की कि लॉकडाउन का सख्ती से पालन करें। इस अपील के कुछ ही घंटे बाद देश के दो बड़े शहरों मुंबईऔर सूरत में लोगों ने लॉकाडाउन को ताक पर रख दिया। वजह खाने-पीने की मुश्किल और भूख। मुंबईके बांद्रा स्टेशन पर झुग्गी बस्तियों में रहने वाले हजारों प्रवासी मजदूर सड़कों परउतर आए। इन लोगों की मांग थी कि इन्हें इनके गांव जाने दिया जाए। इसी तरह सूरत में भी सैकड़ों मजदूर अपने गांव में वापस जाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए।
मुंबई में पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा
मुंबई के बांद्रा स्टेशन पर सड़कों पर आए प्रवासी मजदूरों का कहना था कि उनके पास खाने को कुछ नहीं है। उन्हें उनके गांव वापस जाने दिया जाए। पुलिस प्रशासन ने इन लोगों को समझाने की कोशिश की और इन पर लाठीचार्ज भी करना पड़ा। इस घटना के बाद गृह मंत्री अनिल देशमुख ने बताया कि मंगलवार शाम करीब 4 बजे हजारों लोग बांद्रा स्टेशन के बाहर जमा हो गए थे। ये सभी मजदूर थे और लॉकडाउन के चलते अपने घरों में मौजूद थे। उन्हें भरोसा था कि लॉकडाउन खत्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ इसलिए वह अधीर होकर घरों से बाहर निकल आए। हम उनके खाने-पीने का इंतजाम कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि ये सभी लोग ट्रेन चलने की अफवाह पर बांद्रा स्टेशन पर जमा हो गए थे। बांद्रा की घटना पर महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि लॉकडाउन का मतलब लॉकअप नहीं, प्रवासी मजदूरों को महाराष्ट्र में डरने की जरूरत नहीं, सरकार उनका पूरा ध्यान रखेगी।


सूरत में मजदूरों ने की खाने की डिमांड
सूरत में भी मंगलवार को सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये लोग यहां के वाराछा इलाके में स्थित कपड़ा मिलों में काम करने वाले मजदूर थे। इनका कहना था कि लॉकडाउन में खाना-पीना नहीं मिल रहा है और ऐसे में इन्हें इनके गांव जाने दिया जाए। सरकार इसकी व्यवस्था करे।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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