विशेष पोस्ट

अगर आप भी लाॅकडाउन में कहीं फंसे तो जाने कैसे आप अपने घर वापस जा सकते हैं

Priyanka Singh Spacial Correspondent (SBT24.TV) ✍पटना: देश में लॉकडाउन 17 मई तक बढ़ा दिए जाने के बाद अब विभिन्न राज्यों में फंसे मजदूर और स्टूडेंट्स अपने घर वापस जाना चाहते हैं. ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती ये है कि आपके घर तक जाने वाले ट्रेन का पता कैसे चले? ट्रेन में सीट कैसे बुक होगी? घर से रेलवे स्टेशन तक कैसे पहुंचा जाए? ऐसे तमाम सवाल लोगों के मन में हैं. हम आपको बता रहे हैं सही तरीका ताकि आप सुरक्षित अपने राज्य वापस पहुंच सकें.
रेलवे स्टेशन या बस अड्डे भूल से भी न जाएं
अगर आपको लग रहा है कि अपने घर जाने के लिए किसी तरह रेलवे स्टेशन या बस अड्डे पहुंच जाने से काम बन जाएगा तो आप गलत हैं. दरअसल किसी भी रेलवे स्टेशन या बस अड्डे में टिकटघर नहीं खुले हैं. इसके अलावा इन जगहों पर बिना इजाजत प्रवेश की अनुमति भी नहीं है. तो अगर आप किसी तरह जुगाड़ लगा कर रेलवे स्टेशन या बस अड्डे पहुंच भी गए तो आपका काम नहीं बनने वाला

लोकल DM ऑफिस या ट्रांसपोर्ट विभाग से संपर्क करें
जानकारों का कहना है कि अगर आप किसी अन्य शहर में फंसे हैं और अपने घर वापस जाना चाहते हैं तो आपको स्थानीय डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (जिलाधिकारी) दफ्तर से फोन पर संपर्क करना होगा. इसके अलावा आप स्थानीय ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट से भी फोन करके जानकारी ले सकते हैं. जिलाधिकारी ऑफिस और ट्रांसपोर्ट विभाग ही आपको अपने राज्य तक जाने वाले ट्रेन या बस की जानकारी उपलब्ध करा सकेंगे. इन दोनों विभागों से स्पेशल ट्रेन या बस की सही जानकारी और प्रस्थान की जगह सुनिश्चित करने के बाद ही घर से निकलें.
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को अपने स्थानीय निवासियों को वापस लाने की इजाजत दे दी है. ऐसे में विभिन्न राज्य सरकार एक दूसरे से तालमेल बिठाकर ही स्पेशल बस या ट्रेन की व्यवस्था कर रही हैं. बताते चलें कि फिलहाल यात्रा के लिए रेलवे स्टेशन या बस अड्डे में कोई टिकट नहीं मिल रही है. यहां सीधे पहुंच जाने से कोई सफलता हाथ नहीं लगेगी.

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button