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एक साथ दो स्मार्टफोन में हो सकेगा वॉट्सएप का इस्तेमाल, जानें इसकी सीक्रेट ट्रिक

WhatsApp Update: वॉट्सएप बहुत जल्द यूजर्स की सुविधा के लिए एक नया फीचर पेश करने जा रहा है. इसके लिए वॉट्सएप एक अकाउंट को एक अन्य फोन के साथ या एंड्रॉइड टैबलेट से भी लिंक करने की परमिशन देगा. इससे यूजर्स अपना एक ही वाट्सएप अकाउंट 2 डिवाइस में एक साथ इस्तेमाल कर सकेंगे. वाट्सएप ने इस साल ही लिंक्ड डिवाइसेज फीचर लॉन्च किया था. यह नया फीचर भी उसी का अपडेट होगा. फिलहाल यह नया फीचर केवल बीटा यूजर्स के लिए शुरू किया गया है. उम्मीद की जा रही है कि कंपनी इस फीचर को सभी यूजर्स के लिए जल्द पेश कर सकती है. आइए इस बारे में डिटेल में जानते हैं.

अभी तक यूजर्स अपने वॉट्सएप अकाउंट को सिर्फ एक ही स्मार्टफोन पर इस्तेमाल कर पा रहे हैं. इसके साथ यूजर्स को चार अन्य डिवाइस जैसे डेस्कटॉप,लैपटॉप, टैबलेट आदि से लिंक करने की सुविधा है. इस फीचर के रोलआउट के बाद यूजर्स एक साथ दो स्मार्टफोन में वॉट्सएप का इस्तेमाल कर पाएंगे. हालांकि बीटा यूजर्स के लिए यह सुविधा उपलब्ध है, जिसके इस्तेमाल का तरीका हम यहां बता रहे हैं.

बीटा यूजर्स दो मोबाइल में कैसे वॉट्सएप चलाएं

  • सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में वॉट्सएप खोलें.
  • अब ऐप में टॉप राइट कॉर्नर में दिख रही तीन डॉट पर टैप करें.
  • इसके बाद ‘लिंक्ड डिवाइसेस’ विकल्प पर क्लिक करें.
  • अब ‘लिंक ए डिवाइस’ विकल्प पर टैप कर दें, जिसके बाद आपके फोन की स्क्रीन पर क्यूआर कोड शो होगा.
  • अब अपने दूसरे फोन को वॉट्सएप से लिंक करने के लिए बीटा प्रोग्राम के लिए साइन अप करें.
  • अब आप दूसरे फोन में वॉट्सएप खोलें और फिर लॉग इन करें.
  • अब यहाँ भी आप राइट साइड में दिख रही तीन-डॉट आइकन पर टैप कर दें.
  • फिर ‘लिंक ए डिवाइस’ विकल्प पर टैप करें.
  • अब आपने अपने दूसरे स्मार्टफोन से पहले वाले फोन के क्यूआर कोड को स्कैन कर लें, जिसके बाद आपके दो फोन में एक साथ वॉट्सएप चल जायेगा.
  • नोट: यह नया अपडेट वॉट्सएप यूज़र्स को उन सभी डिवाइस की संख्या भी दिखाएगा, जो वॉट्सएप से लिंक हैं. 

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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