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वर्क फ्रॉम होम का ऑफर शख्स को पड़ा भारी, गंवा दिए 20 लाख रुपये से ज्यादा

Work From Home Hotel Rating: ग्रेटर नोएडा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शख्स से ‘वर्क-फ्रॉम-होम होटल रेटिंग’ के नाम पर 20 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी की गई. इस स्कैम के बाद एक बार फिर साबित हो गया है कि ऑनलाइन ठगी के मामलों में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. आइए इस स्कैम के बारे में जानते हैं. 

शख्स से कैसे की गई ठगी?

ग्रेटर नोएडा के रहने वाले शख्स को एक अनजान नंबर से कॉल आया जिसमें उसे ‘वर्क-फ्रॉम-होम होटल रेटिंग’ का ऑफर दिया गया. कॉलर ने खुद को एक नामी होटल बुकिंग पोर्टल का मैनेजर बताया और कहा कि उसे घर बैठे होटल रेटिंग का काम दिया जाएगा. इसके बदले में उसे मोटी रकम का भुगतान किया जाएगा. 

कॉलर ने शख्स को समझाया कि उसे अलग-अलग होटलों को रेट करना है और इसके बदले में उसे अच्छी-खासी कमाई होगी. इस लुभावने ऑफर के चक्कर में शख्स ने अपनी सहमति दे दी और कॉलर ने उसे एक लिंक भेजा, जिसमें एक ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया. 

फेक ऐप और पैसे की मांग

जब शख्स ने उस ऐप को डाउनलोड किया और उसमें अपनी बैंक डिटेल्स भरीं, तो उसने देखा कि उसे शुरुआत में कुछ पैसे भेजे जा रहे हैं. इससे व्यक्ति को यकीन हो गया कि यह काम असली है लेकिन कुछ दिनों बाद कॉलर ने उसे अलग-अलग कारण बताकर बार-बार पैसे जमा करने के लिए कहा. शख्स बारी-बारी से पैसे देता रहा और बाद में उसे ठगी का अहसास हुआ. 

कुछ दिनों बाद शख्स को पता चला कि उसके साथ बड़ा स्कैम हो चुका है. तब तक शख्स 20 लाख 54 हजार रुपये खो चुका था. उसे न तो कोई काम मिला और न ही कोई होटल रेटिंग का मौका मिला. शख्स ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. 

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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