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गूगल मीट पर आया कमाल का फीचर, अब स्पेसबार दबाकर खुद को करें MUTE और UNMUTE

Google Meet New Features Released: अगर आप गूगल मीट के यूजर्स हैं तो यह खबर आपके काम की है. गूगल अपने इस प्लेटफॉर्म के लिए एक नया फीचर लेकर आई है. कंपनी का कहना है कि अब मीट यूजर्स जल्द ही स्पेसबार को दबाकर खुद को अनम्यूट कर सकेंगे और इसे रिलीज करके खुद को फिर से म्यूट कर सकेंगे. समाचार एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का कहना है कि यह फीचर यूजर्स के लिए कुछ कहने के लिए जल्दी से अनम्यूट करके मीटिंग में उनके पार्टिसिपेशन को आसान बना देगा.

कंपनी का कहना है, “यह फीचर उन स्थितियों में भी मदद करेगी जहां आप खुद को अनम्यूट करने के बाद फिर से म्यूट करना भूल जाते हैं. वैसे तो यह फीचर डिफ़ॉल्ट रूप से बंद है लेकिन आप इसे Google मीट सेटिंग में जाकर एक्टिवेट कर सकते हैं.”

मीट के लिए वॉयस कंट्रोल सेटिंग में भी बदलाव

गूगल ने एक ब्लॉग पोस्ट में एक और फीचर के बारे में बताते हुए कहा, अब Google मीट हार्डवेयर के लिए “हे गूगल” वॉयस कंट्रोल की सेटिंग भी अपडेट की गई है. इस अपडेट के साथ, अब Google असिस्टेंट केवल तभी सक्रिय होगा जब कोई डिवाइस मीटिंग में न हो और आगामी मीटिंग के 10 मिनट के अंदर हो.

एक और फीचर गूगल ने किया जारी

Google ने एक और नया फीचर सोमवार को लॉन्च किया है. यह सुविधा आपको उच्च-प्रदर्शन वाले कस्टम फ़ंक्शन बनाने की अनुमति देती है जो बिल्ट-इन शीट्स फॉर्मूला निर्माण का समर्थन करते हैं. कंपनी ने कहा कि यूजर्स अब गैर गूगल यूजर्स को सामग्री अपलोड करने या गूगल वर्कस्पेस पर संगठनों और यूजर्स के स्वामित्व वाली साझा ड्राइव के अंदर फ़ाइलें बनाने की अनुमति देने के लिए विज़िटर शेयरिंग का उपयोग कर सकते हैं.

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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