विशेष पोस्ट

पियक्कड़ों की आने वाली है मौज : लॉकडाउन खुलते ही शराब के दाम होंगें धडाम!

 

राजेश तिवारी विशेष संवाददाता लखनऊ ✍
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कोरना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन लागू है। इससे कई उद्योग धंधे प्रभावित हुए हैं। शराब के ठेके और दुकानें भी बंद हैं। हालांकि, लॉकडाउन के दूसरे चरण में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने कुछ औद्योगिक इकाइयों को शुरू करने की बात कही थी, जिनमें शराब और बीयर के उत्पादन की बिक्री भी शामिल है। इसके तहत दुकानों के लाइसेंस आवंटन की पहले से तय शर्तों को कोरोना संकट की वजह से पूरा न कर पाने की फुटकर और थोक विक्रेताओं की दिक्कतों के निस्तारण के लिए शासनादेश जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि देसी, अंग्रेजी शराब और बीयर की दुकानों पर पूरे प्रदेश में जो स्टॉक बचा हुआ है, उसे लाकडाउन खुलने के शुरुआती सात दिनों में हर हाल में बेचना होगा। इसके लिए शराब व बीयर के दाम घटाए जा सकते हैं।
थोक व फुटकर विक्रेता को अपने स्टॉक को आदेश के सात दिनों के भीतर शराब व बीयर बेचनी होगी। बार व क्लब के संचालकों को स्टॉक खपाने के लिए लॉकडाउन खुलने से एक पखवारे की अवधि की अनुमति दी गई है। इस शासनादेश के अनुसार प्रदेश में देसी शराब की दुकानों जिनके लाइसेंस का नवीनीकरण हो गया है और जिनका नहीं हुआ, उन्हें सात दिन के भीतर अपना शराब व बीयर बेचनी होगी। ऐसी कुल 12467 दुकानें हैं और इनमें लगभग 736830 पेटी देसी शराब का स्टॉक बचा हुआ है, जिसका अनुमानित मूल्य लगभग 215.20 करोड़ है।
इसी तरह देसी शराब के थोक विक्रेताओं जिनके लाइसेंस का नवीनीकरण हुआ है और जिनका नहीं हुआ है, के यहां लगभग 249954 पेटी देसी शराब का स्टॉक बचा हुआ है जिसका अनुमानित मूल्य लगभग 215 करोड़ रुपये है।अंग्रेजी शराब और बीयर की फुटकर दुकानों और माडल शॉप पर लगभग 960036 पेटी अंग्रेजी शराब और बीयर का स्टॉक बचा है। शासनादेश में कहा गया है कि लाकडाउन खुलने के 24 घंटे के भीतर थोक और फुटकर विक्रेताओं को अपने पूरे स्टाक की घोषणा करनी होगी।
कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए आबकारी नीति घोषित की थी। इस दौरान देसी शराब की दुकान की बेसिक लाइसेंस फीस पिछले वर्ष के मुकाबले 10 प्रतिशत, अंग्रेजी शराब की दुकान की बेसिक लाइसेंस फीस में भी 20 प्रतिशत और बीयर की दुकान की लाइसेंस फीस में 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी का फैसला किया गया था।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button