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पीएम मोदी ने यूएई में लॉन्च किया RuPay कार्ड, अब UAE में भी काम करेगा UPI

UPI in UAE: भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने हाल ही में अपने-अपने देशों के इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम – यूपीआई और एएएनआई (यूएई का ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम) को एक करने के साथ-साथ कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूएई के दौरे पर गए हुए हैं, जहां उन्हें दोनों देशों के यूपीआई इंटीग्रेशन के साथ-साथ कई बड़े फैसले लिए हैं.

यूएई में लॉन्च हुए RuPay

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई में रुपे (Rupay) कार्ड भी लॉन्च किया है. दरअसल, भारत और यूएई दोनों देशों में अपने-अपने घरेलू डेबिट और क्रेडिट कार्ड को आपस में जोड़ने का फैसला किया है. इसका मतलब है कि अब भारत का  RuPay कार्ड और यूएई का JAYWAN कार्ड आपस में जुड़ जाएंगे, जिससे दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे देशों में ऑनलाइन पेमेंट करने या शॉपिंग करने या कार्ड से संबंधित तमाम सुविधाओं को पाने में आसानी होगी.

इन एग्रीमेंट्स का उद्देश्य दोनों देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल ट्रांजैक्शन को आसान बनाना है. पीएम मोदी ने इन एग्रीमेंट्स के महत्व की बात करते हुए कहा कि, “RuPay और JAYWAN कार्ड को जोड़ने से फिनटेक क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हो सकती है, जिससे बेहतर वित्तीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा.” इसके अलावा, दोनों देशों ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक मेमोरनडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए हैं.

7 देशों में उपलब्ध यूपीआई की सुविधा

गौरतलब है कि पिछले साल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और यूएई के सेंट्रल बैंक ने UPI को यूएई के इंस्टेंट पेमेंट प्लेटफॉर्म (IPP) के साथ जोड़ने के लिए एक एग्रीमेंट पर साइन किए थे. आपको बता दें कि यूएई में हुए इन घटनाक्रम से पहले हाल ही में श्रीलंका और मॉरीशस में भी यूपीआई सेवाओं की शुरूआत की गई थी. इससे जिससे भारतीय नागरिकों के लिए डिजिटल लेनदेन करना काफी आसान हो गया है. आपको बता दें कि यूपीआई की सुविधा नेपाल, भूटान, सिंगापुर, फ्रांस, मॉरीशस और श्रीलंका सहित सात देशों में उपलब्ध है.

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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