उत्तर प्रदेश

बिजनौर समेत आठ जिलों में 11 अप्रैल को पडेंगे वोटे…..मुजफ्फरनगर,सहारनपुर, कैराना, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद व गौतमबुद्धनगर में प्रथम चरण में मतदान

राजेश तिवारी (विशेष संवाददाता) लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों का ऐलान होने के साथ ही उत्तर प्रदेश में भी आचार संहिता लागू हो गयी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने केन्द्रीय चुनाव आयोग के निर्देश पर यूपी में 80 लोकसभा सीटों पर 7 चरणों में चुनाव कराने की तैयारियों को अंतिम रूप देते हुए कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। 11 अपै्रल से 19 मई तक सात चरणों में मतदान के पश्चात 23 मई को मतगणना होगी। प्रदेश में पहले चरण में आठ सीटों पर 11 अपै्रल को मतदान होगा, जिसमें मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, कैराना, बिजनौर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद व गौतमबुद्धनगर जनपद शामिल

दूसरे चरण में भी 8 जिलों नगीना, अमरोहा, बुलन्दशहर, अलीगढ, हाथरस, मथुरा, आगरा व फतेहपुर सीकरी में 18 अपै्रल को मतदान होगा। इसी प्रकार तीसरे चरण में दस सीटों पर 23 अप्रैल को वोट पडेंगे, जिसमें मुरादाबाद, रामपुर, सम्भल, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, आंवला, बरेली व पीलीभीत सीट शामिल हैं।

चौथे चरण में 13 जनपदों में 29 अपै्रल को वोट डाले जायेंगे। जिसमें शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, हरदौई, मिश्रिख, उन्नाव, फरूखाबाद, इटावा, कन्नौज, कानपुर, अकबरपुर, जालौन, झांसी व हमीरपुर में मतदान होगा। इसी प्रकार पांचवें चरण में 14 लोकसभा सीटें शामिल की गई हैं, जिसमें धौहारा, सीतापुर, महाराजगंज, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, बांदा, फतेहपुर, कौशाम्बी, बाराबंकी, फैजाबाद, बहराइच, कैशरगंजव गौण्डा लोकसभा सीट शामिल हैं। इसी प्रकार छठें चरण में भी 13 जिलों में मतदान होगा, जिसमें सुल्तानपुर, प्रतापगढ, फूलपुर, इलाहाबाद, अम्बेडकरनगर, श्रावस्ती, डुमरियागंज, बस्ती, संतकबीरनगर, लालगंज, आजमगढ, जौनपुर, मछलीशहर, भदौही लोकसभा सीट शामिल हैं। सातवें व अंतिम चरण में बुन्देलखण्ड की 14 सीटों पर वोट पडेंगे, जिसमें महाराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदोली, वाराणसी, मिर्जापुर व रोबर्टसगंज लोकसभा सीट शामिल हैं। सभी सीटों पर मतदान सम्पन्न होने के पश्चात 23 मई को एक साथ मतगणना होगी।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button