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Free Fire Max गेम में बनना है मास्टर? बस जान लीजिए ये जरूरी ट्रिक्स

Free Fire Max Game Important Tricks: फ्री फायर मैक्स ऐसा गेम है, जिसकी फैन फॉलोइंग अच्छी खासी है. दुनिया के कई ऐसे देश हैं, जहां इस गेम को बढ़-चढ़कर खेला जाता है. अगर आप इस गेम में बिगनर है और चाहते हैं कि आप फ्री फायर मैक्स में प्रो बन जाएं तो हम आपको ऐसी कुछ ट्रिक्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें अप्लाई करने के बाद आप खुद जान जाएंगे कि कैसे आप अच्छी तरह गेम खेल सकते हैं. आइए जानते हैं कि इन ट्रिक्स का इस्तेमाल कर आप अपने गेम को कैसे बेहतर बना सकते हैं. 

सही हथियारों का चुनाव

अगर आप इस गेम को खेलते हैं तो इस बात से अच्छे से वाकिफ होंगे कि फ्री फायर मैक्स में हथियार कितने मायने रखते हैं. इसलिए आपके लिए सबसे पहली और जरूरी चीज यही है कि उन हथियारों का चुनाव करें जो आपके प्ले स्टाइल से मेल खाते हो. उदाहरण के तौर पर आक्रामक तरीके से खेलने के लिए आपको कम दूरी के हथियारों की जरूरत पड़ेगी. वहीं लंबी दूरी के लिए स्नाइपर जैसे हथियार सही हैं. 

कैरेक्टर को चुनना

गेमर्स के लिए सही कैरेक्टर का चुनाव करना भी काफी जरूरी होता है. अगर आपके पास एक अच्छा कैरेक्टर होगा तो आप किसी भी गेम में जीत हासिल कर सकते हैं. लेकिन यह पूरी तरह से गेमर की च्वॉइस पर डिपेंड करता है वो किस कैरेक्टर को अपने गेम के लिए चुन रहा है. उदाहरण के तौर पर आप Kelly, Alok, Mozam जैसे कैरेक्टर चुन सकते हैं. 

मैप को अच्छे से जानना

फ्री फायर मैक्स में जीत हासिल करने के लिए आपको एक चीज यह करनी है कि मैप को अपने दिमाग में अच्छे से जान छाप लें. आपको यह जानना होगा कि मैप में ऐसी कौन सी जगहें हैं, जहां लूट हो सकती हैं और किस जगह पर दुश्मनों को टारगेट किया जा सकता है. 

हेडशॉट्स की करें प्रैक्टिस 

एक जरूरी ट्रिक आपके गेम के लिए यह है कि आपको अच्छे तरीके से हेडशॉट्स के बारे में जानना है. . इसके लिए गेमर्स को अपने फ्री फायर मैक्स में बढ़िया सेंसिटिविटी सेटिंग्स और उसके बाद हेडशॉट का ज्यादा से ज्यादा अभ्यास करना बेहद जरूरी है. 

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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