विशेष पोस्ट

देश मे रह रहे फर्जी देशभक्त ओर झूटी मीडिया जो हर समय हिन्दू मुस्लिम कराने में लगी रहती है उसको इसके अलावा कुछ नही आता ,,

राजेश तिवारी विशेष संवाददाता (SBT24TV)
“मुरादाबाद” के किसी कोने में हुई निंदनीय घटना के लिए पूरी कम्युनिटी को दोषी ठहरा चुके हो तो आपको बता दूं कुछ दिन पहले मुजफ्फरनगर में लॉकडाउन का पालन कराने पर पुलिस पर हमला कर दिया गया। हमले में महिलाएं भी शामिल रही थी और पंजाब का भी आपने देखा कैसे एक पुलिस वाले का सरेआम हाथ काट दिया था । इसके साथ ही कल ही के दिन हुई चार अन्य घटनाओं पर भी नजर डालिए !

पहली घटना- बनारस के मछोदरी पुलिस चौकी के पास खाना बाँटने गए पुलिस कर्मियों पर पथराव हुआ, घायल पुलिसकर्मीयो को जान बचाकर भागना पड़ा, बाद में इलाके में फ़ोर्स तैनात की गई और दो लोगों जिनके नाम “कुंदन और नरेश” हैं, की गिरफ़्तारी हुई है।

दूसरी घटना- बेगूसराय बिहार में मछली खरीदने गए युवक की सत्तू पीते हुए पुलिस ने की पिटाई, “राजन” नाम के युवक का सर फटने पर ग्रामीणों ने किया पुलिस पर पथराव, जान बचाकर भागने पर विवश हुई पुलिस।

तीसरी घटना- बिहार के औरंगाबाद जिले के गोह प्रखंड के अकौनी गांव में जांच करने गई मेडिकल टीम पर बुधवार को जानलेवा हमला किया गया। इस हमले में आयुष चिकित्सक अर्जुन कुमार, एएनएम नीलू कुमारी, केयर इंडिया के प्रबंधक अनुज कुमार घायल हो गए।

चौथी घटना- पूर्वी चम्पारण जिला के हरसिद्धि प्रखंड के जागापाकड़ गाँव मे ग्रामीणों ने एक संदिग्ध व्यक्ति की जांच करने गई टीम के बीडीओ, एसडीओ, डॉक्टर और तीन पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया है।

मेरी नजर में “मुरादाबाद” समेत अन्य घटनाएं “अराजक तत्वों” के द्वारा घटित की गई हैं, और “अराजक तत्व” किसी भी “कम्युनिटी” में हो सकते हैं, जिन पर कड़ी कार्रवाई होना चाहिए, परंतु यदि आप इनमें से किसी भी एक घटना को उठाकर पूरी “कम्युनिटी” को दोषी ठहराने का प्रयास करते हैं, तो मुझे यह कहने में हर्ज नहीं कि आपकी आंखों में “शर्म नहीं है ” और दिमाग में “नफरत के एस्केरिस” पल रहे हैं।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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