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‘OpenAI अब Open नहीं रहा…’ मस्क ने ओपनएआई को लेकर क्यों कही ये बात?

Elon Musk Attacks on OpenAI: टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन  मस्क ने OpenAI पर एक बार फिर हमला बोला है. एलन मस्क ने कहा कि OpenAI अब अपने उद्देश्य से भटक चुका है और उसमें ओपन नाम की कोई चीज नहीं रह गई है.  

एलन मस्क ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि OpenAI का मक्सद था कि एआई सभी के लिए आसान और सुरक्षित हो. लेकिन अब यह एक व्यापारिक संगठन बन गया है, जो केवल पैसे कमाने पर ध्यान दे रहा है. मस्क का कहना है कि OpenAI अब अपने पुराने वादों से पीछे हट गया है. 

मस्क ने एक्स पर क्या लिखा? 

मस्क के मुताबिक, OpenAI को एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में शुरू किया गया था, ताकि AI को सबके लिए फायदेमंद और सुरक्षित बनाया जा सके. लेकिन अब यह एक मुनाफा कमाने वाली कंपनी बन गई है, जो केवल अपने फायदे के बारे में सोच रही है. यह बदलाव OpenAI के मूल के खिलाफ है और इससे AI की ट्रांसपेरेंसी पर सवाल उठते हैं. 

OpenAI ने मस्क के इन आरोपों पर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है लेकिन टेक्नोलॉजी की दुनिया में यह खबर तेजी से फैल रही है और लोग इस पर अलग-अलग राय दे रहे हैं. कुछ लोग मस्क की बात से सहमत हैं और मानते हैं कि OpenAI को अपने पुराने मक्सद पर लौटना चाहिए. जबकि कुछ का कहना है कि समय के साथ हर संगठन में बदलाव आते हैं और OpenAI का व्यापारीकरण जरूरी था.

OpenAI की तरफ से अभी कोई जवाब नहीं

यह पहली बार नहीं है जब मस्क ने OpenAI की आलोचना की हो. पिछले साल भी उन्होंने इसी तरह की शिकायत की थी, जिसके बाद OpenAI ने कुछ बदलाव किए थे. लेकिन इस बार मस्क का कहना है कि ये बदलाव पर्याप्त नहीं हैं और OpenAI को अपनी नीतियों पर फिर से विचार करना चाहिए.

मस्क के इस बयान से एक बार फिर से AI की सुरक्षा और पारदर्शिता पर बहस शुरू हो गई है. अब देखना यह है कि OpenAI इस पर कैसे जवाब देता है और क्या वह अपने संस्थापक के आरोपों का जवाब दे पाता है या नहीं. 

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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