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लाॅकडाउन के दौरान रोजी-रोटी से वंचित लोगों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराने की समुचित व्यवस्था, असहाय लोगों को प्रतिदिन पके हुए भोजन के पैकेट कराए जा रहे हैं उपलब्ध- जिलाधिकारी रमाकांत पांडे

जिलाधिकारी रमाकांत पाण्डेय ने बताया कि जिले में लाॅकडाउन के दौरान रोजी-रोटी से वंचित लोगों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराने की समुचित व्यवस्था की गई, जिसके लिए जिला प्रशासन द्वारा 02 सकरारी कम्युनिटी किचेन तथा 03 स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा उपलब्ध कम्युनिटी किचेन व्यवस्था के माध्यम से नियमित रूप से प्रतिदिन 3625 लोगों को निशुल्क पका हुआ/पैकेट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होनंे बताया कि जिले में सरकारी कम्यूनिटी किचेन लोक निर्माण विभाग, बिजनौर के निरीक्षण भवन तथा लेखपाल प्रशिक्षण विद्यालय, स्वाहेड़ी खुर्द में स्थापित किए गए हैं, जिनके द्वारा प्रतिदिन 1375 पैकेट भोजन सामग्री निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है तथा 03 स्वैच्दिक संस्थाओं, जिनमें व्यापार मण्डल व मेडिकल एसोसिएशन, माता वैष्णो देवी यात्रा सेवा ट्रस्ट तथा मदनलाल एण्ड संस, नगीना रोड, बिजनौर शामिल हैं, के द्वारा भी कम्युनिटी किचेन के माध्यम से प्रतिदिन 2250 असहाय लोगों को निशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
कम्यूनिटी किचेन सेवा कार्य के प्रभारी तहसीलदार सदर, धर्मेंन्द्र सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी श्री रमाकांत पाण्डेय के निर्देशों के अनुपालन में शीध्र ही एजाज अली हाॅल, बिजनौर कार्यालय नगर पालिका हल्दौर, कार्यालय नगर पंचायत मण्डावर, कार्यालय नगर पंचायत, झालू सहित अन्य स्थानों पर भी सरकारी कम्युनिटी किचेन की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा अन्य समाजसेवी एवं स्वैच्छी संस्थाओं द्वारा भी कम्युनिटी किचेन के माध्यम से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में निशुल्क पका भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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