टैकनोलजी

आज दिनभर गूगल के डूडल पर क्यों छायी रहीं Dr Maria Teleks? उन्हें Sun Queen क्यों कहा जाता है?

Dr Maria Telkes: आज गूगल ने अपने डूडल पर, सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण योगदान देने वालीं डॉक्टर मारिया टेलकेस (Dr. Maria Telkes) की याद में गूगल डूडल बनाया. आज के दिन यानि 12 दिसंबर 2022 को, मारिया टेलकेस का 122वां जन्मदिन हैं. टेलकेस के सोलर एनर्जी के क्षेत्र में दिए गए योगदान की वजह से उनको ‘Sun Queen’ भी कहा जाता है.

डॉक्टर मारिया टेलकेस कौन थीं?

टेलकेस का जन्म बुडापेस्ट के हंगरी शहर में 1900 में हुआ था. गूगल डूडल के मुताबिक इनका जन्म 11 दिसंबर का है. टेलकेस को 1952 में ‘द सोसाइटी ऑफ वीमेन इंजिनीर्स अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया था.

डॉ टेलकेस ने बुडापेस्ट की Eotovs Lorand University से फिजिकल केमिस्ट्री में पढ़ाई करते हुए, 1920 में ग्रेजुएशन की डिग्री ली और 1924 में PhD की डिग्री लेकर आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चली पहुंच गयीं और 1937 में अमेरिका की नागरिकता हासिल कर ली.

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सोलर डिस्टलर

डॉ टेलकेस को प्रतिष्ठित Massachusetts Institute of Technology (MIT) में सोलर एनर्जी कमेटी में जगह दी गयी. टेलकेस के काम को देखते हुए, अमेरिकी सरकार ने उन्हें एक सोलर डिस्टिलर बनाने का निमंत्रण दिया. इस सोलर डिस्टिलर का काम समुद्र के पानी को फ़िल्टर करके पीने लायक बनाना था. इस अविष्कार को काफी सराहा गया. इस डिस्टिलर का प्रयोग दूसरे विश्व युद के समय सैनिकों ने किया.

20 से ज्यादा पेटेंट

डॉ टेलकेस के नाम 20 से ज्यादा पेटेंट दर्ज हैं. टेलकेस ने 1984 में प्राइवेट फंडिंग और आर्किटेक्ट Eleanor Raymond की मदद से ‘डोवर सन हाउस’ बनाया. जिसे ‘सोलर एनर्जी’ नाम से जाना गया. इसकी दुनियाभर में तारीफ हुई.

सोलर ओवन डिजाइन

इसके अलावा डॉ टेलकेस को ‘सोलर ओवन डिजाइन’ के लिए भी याद किया जाता है. उनके इस प्रोजेक्ट को Ford Foundation से मान्यता दी गयी. जिसके बाद उन्हें ‘Sun Queen नाम दिया गया.

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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