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दिल्ली के मुनेरिका में गिरी चार मंजिला इमारत, 12 लोग घायल, 3 की हालत नाजुक

दिल्ली के मुनेरिका गांव में ब्यायलर फटने की खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि ब्वॉयलर फटने से चार मंजिल इमारत की दीवार गिर गई है, जिसके बाद 12 लोग घायल हुए हैं। इनमें से 4 की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है।

गौरतलब है कि दो दिन पहले ही राजस्थान के भरतपुर जिले में चामंडा माता मंदिर इलाके में तेज आंधी में एक शादी घर की दीवार ढह गई थी। इस हादसे में चार बच्चों और आठ महिलाओं सहित मरने वालों की संख्या 25 हो गई है, जबकि 28 अन्य जख्मी बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद पूरा जश्न का माहौल मातम में बदल गया। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार के अनुसार, अन्नपूर्णा शादी घर में एक विवाह कार्यक्रम के दौरान दीवार ढहने से मलबे के नीचे दब जाने की वजह से 25 लोगों की मौत हो गई और 28 अन्य जख्मी हो गए। मृतकों में, 11 पुरूष, आठ महिलाएं और चार बच्चे शामिल हैं। मृतकों और घायलों में जयपुर से आई बारात के बाराती भी शामिल हैं।

कुमार ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मलबे में दबे लोगों को निकाला और उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंदरा राजे ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। बताया जा रहा है कि तेज आंधी की वजह से मैरिज हॉल की कमजोर दीवार गिरी है। हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जानकारी के मुताबिक अन्नपूर्णा मैरिज हॉल भरतपुर जिले के सेवर रोड पर स्थित हैं, जहां पर बारातियों के डिनर का कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान यह दीवार गिर गई। इसके बाद यह माहौल पूरी तरह से शोक में बदल गया। यह बारात जयपुर से आई थी।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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