उत्तर प्रदेश

पोल्ट्री और अण्डा सहित पोल्ट्री उत्पादों का उपभोग पूरी तरह से सुरक्षित, पोल्ट्री उत्पादों एवं मीट का सेवान बिना किसी भय के करें ताकि शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्वि हो सके- जिलाधिकारी रमाकांत पाण्डेय

बिजनौर जिलाधिकारी रमाकांत पाण्डेय ने निदेशक, प्रशासन एवं विकास, पशुपालन विभाग, उ0प्र0 शासन द्वारा जारी पत्र के हवाले से जानकारी देते हुए बताया कि करोराना वायरस कोविड-19 का संक्रमण अण्डा एवं चिकेन से होने की अफ़वाहों और भ्रांतियों के प्रचारित होने के कारण जनसामान्य में अण्डा एवं चिकेन के बारे में भ्रांतियां पैदा हो गई हैं, जबकि अण्डा और चिकेन में पाया जाने वाला प्रोटीन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक है। उन्होनंे बताया कि संयुक्त सचिव, भारत सरकार, मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, कृषि भवन नई दिल्ली द्वारा जारी अपने पत्र में अण्डा और चिकेन से संबंधित अफवाहों को पूरी तरह निराधार और भ्रमामक बताया गया है। उन्होनंे बताया कि वल्र्ड एनीमल हेल्थ आॅरगनाईजेशन (व्प्म्) के अनुसार नोवेल कोरोना वायरस (काविड-19) का संक्रमण मानव से मानव में होता है। विश्व में अभी तक कहीं भी पोल्ट्री से इंसान में कोरोना वायरस के संक्रमण की सूचना प्राप्त नहीं हुई है। उन्होने बताया कि पोल्ट्री और अण्डा सहित पोल्ट्री उत्पादों का उपभोग पूरी तरह से सुरक्षित है तथा चिकित्सा अनुभाग-5 उ0प्र0 शासन द्वारा खाद्य एवं रसद, सामग्रीयों के अंतर्गत चिकेन एवं अण्डा के अलावा मीट को भी चिन्हित किया गया है। उन्होंने जिले के सभी कुक्कुट पालकों, उपभोकताओं एवं जानसामान्य का आहवान किया है कि पोल्ट्री उत्पादों, चिकेन, अण्डा एवं मीट का सेवान बिना किसी भय के करें ताकि लोगों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृृद्धि हो सके।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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