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पहले मुसलमान और अब सिखों को बदनाम करने की साजिश-अकाल तख्त जत्थेदार हरप्रीत सिंह

नई दिल्ली: नांदेड़ लौट रहे कई तीर्थयात्रियों के कोविद -19 के प्रसार के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने पर अकाल तख्त जत्थेदार हरप्रीत सिंह ने शुक्रवार को दावा किया कि तब्लीगी जमात प्रकरण के बाद जिस तरह मुस्लिमों को निशना बनाया गया। उसी तरह से ये सिखों को बदनाम करने की साजिश थी।
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, हाल के दिनों में महाराष्ट्र के हजूर साहिब मंदिर से लौटे 3,000 से अधिक तीर्थयात्रियों में से कम से कम 115 को कोरोनावायरस से संक्रमित पाया गया है। सिखों की सर्वोच्च अस्थायी सीट का नेतृत्व करने वाले जत्थेदार ने अब इसकी तुलना मुस्लिम समुदाय के दुर्व्यवहार से की है, जो लोग नई दिल्ली में तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में भाग लेने के बाद देश भर में अपने घरों पर लौटने के दौरान संक्रमित पाये गए थे।
उन्होंने दावा किया कि तब्लीगी जमात प्रकरण को लेकर पूरे मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने की दौड़ चल रही थी और अब उसी तरह का प्रचार किया जा रहा है। धार्मिक नेता ने कहा, यह एक बहुत बड़ी साजिश है।
इस मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक टीवी चैनल पर साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कहा कि नांदेड़ से सिख संगतियों की जांच किए बिना ही उन्हें पंजाब भेज दिया गया और उनकी जांच को लेकर झूठ बोला गया कि उनकी कोरोना जांच की गई है। अगर हमें पता होता कि इन लोगों का कोरोना  टेस्ट नहीं हुआ है तो हम टेस्ट कराते।
अमरिंदर सिंह ने कहा कि शुक्रवार तक 585 कोरोना मरीज पंजाब में पाए गए हैं. जो लोग पंजाब से जाना चाहते हैं और जो लोग आना चाहते हैं उन्हें मैं कैसे रोक सकता हूं। सीएम अमरिंदर सिंह ने नांदेड़ के श्रद्धालुओं को लेकर कहा कि पंजाबी जहां भी फंसे होंगे उन्हें लाना ही होगा क्योंकि वो इस राज्य के नागरिक हैं। इसलिए उनको वहां से लाऊंगा ही।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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