उत्तर प्रदेश

सहारनपुर में सपा पर भारी पड़ी कांग्रेस, इमरान मसूद नकुड़ सीट पर देंगे धर्म सिंह को चुनौती

सहारनपुर  सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीटों के बंटवारे पर कांग्रेस सपा पर भारी पड़ी। उसके उम्मीदवार चार सीटों नकुड़, बेहट, रामपुर मनिहारान सुरक्षित एवं देवबंद पर लड़ेंगे। जबकि हिस्से में आई तीन सीटों सहारनपुर नगर, सहारनपुर देहात और गंगोह पर सपा के उम्मीदवार होंगे। मुस्लिमों पर मजबूत पकड़ रखने वाले प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष इमरान मसूद के कारण कांग्रेस प्रभावी भूमिका में रही। गंठबंधन के चुनावी लाभ-हानि को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई है। 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे को लेकर इमरान मसूद और उसके चाचा पूर्व केंद्रीय मंत्री रशीद मसूद सपा छोड़कर कांग्रेस में चले गए थे। जिसका सपा और कांग्रेस दोनो को नुकसान उठाना पडा था। कांग्रेस और सपा एक-एक सीट ही जीत सके थे। जबकि बसपा को चार सीटें मिल गई थी। भाजपा केवल सहारनपुर नगर सीट ही जीत पाई थी। लोकसभा चुनाव से पूर्व इमरान मसूद अपने चाचा रशीद मसूद से अलग हो गए और सपा में चले गए। सपा ने उन्हें सहारनपुर में लोकसभा उम्मीदवार घोषित कर दिया। बाद में एक मामले में सजा सुनाए जाने के बाद रशीद मसूद कांग्रेस छोडकर सपा में वापस आ गए। उधर सपा ने इमरान मसूद का टिकट काट दिया और रशीद मसूद के बेटे शादान मसूद को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। विरोध स्वरूप इमरान मसूद वापस कांग्रेस में चलेग गए जहां उन्हें लोकसभा उम्मीदवार बना दिया गया। लोकसभा चुनाव के दौरान इमरान मसूद के नरेंद्र मोदी के बौटी-बौटी कर देने वाले विवादास्पद ब्यान के चलते इमरान मसूद पूरे देश में चर्चित हो गए और वह चुनाव में भाजपा को कडी टक्कर देते हुए चार लाख आठ हजार 816 वोट लेने में सफल रहे

भाजपा के विजयी उम्मीदवार राघव लखनपाल शर्मा को 4 लाख 66 हजार 261 वोट मिले। इमरान मसूद बेहट और सहारनपुर देहात सीटों के तहत पहले स्थान पर रहे। बेहट में उन्होंने 89 हजार 920 और सहारनपुर देहात में 84823 वोट लिए। सहारनपुर नगर सीट पर वह दूसरे स्थान पर रहे। लेकिन वे एक लाख नौ हजार 793 वोट पड़े। इमरान मसूद ने 2012 के विधानसभा चुनाव में नकुड़ सीट पर बसपा के विजयी उम्मीदवार धर्म सिंह सैनी (89187 वोट) को कड़ी टक्कर देते हुए 84 हजार 623 वोट लेकर अपनी ताकत साबित कर दी थी। सहारनपुर के घोषित सपा उम्मीदवार संजय गर्ग एवं अन्य दूसरे नेता सपा नेतृत्व पर कांग्रेस से गठबंधन के लिए इसी कारण दवाब बनाए हुए थे  कि इस चुनाव में सपा को इमरान मसूद के मुसलमान पर पकड़ का लाभ मिल जाएगा। गठबंधन बनने से सपा को उसके हिस्से में आई तीनों सीटों पर लाभ मिलने की प्रबंल संभावना है। इमरान मसूद गठबंधन के जरिए सहारनपुर जनपद में करीब-करीब सभी सीटों पर अपने मन-माफिक उम्मीदवार भी लाने में सफल हो गए। इस गठबंधन से सबसे तगडा झटका दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी को लगा। उनके दामाद उमर अली खां को बेहट सीट छोडने को मजबूर होना पडा। 2012 के चुनाव में इमरान मसूद के समर्थक कांग्रेस उम्मीदवार नरेश सैनी 69760 वोट लेने के बावजूद बसपा उम्मीदवार महावीर राणा से हार गए थे। राणा को 70 हजार 274 वोट मिले थे। सपा के उमर अली खां ने 47 हजार 366 वोट लिए थे। गठबंधन उम्मीदवार कांग्रेस के नरेश सैनी को इसका लाभ मिल सकता है। कांग्रेस ने रामपुर मनिहारान सीट से विश्व दयाल उर्फ छोटन को उम्मीदवार बनाया है। पिछले चुनाव में सपा के टिकट पर 47 हजार 492 वोट लिए थे।

कांग्रेस को 50 हजार 668 वोट मिले थे। जाहिर है इस बार सपा उम्मीदवार न होने से कांग्रेस को लाभ मिलेगा और वह बसपा के दो बार के विधायक रविंद्र मोल्हू को कड़ी टक्कर देंगे। मोल्हू को पिछले चुनाव में 77 हजार 274 वोट मिजे थे। भाजपा ने यहां नया उम्मीदवार देंवेंद्र निम उतारा है। पिछले चुनाव में भाजपा यहां 16 हजार वोटों पर सिमट गई थी। देवबंद सीट पिछले चुनाव में सपा के राजेंद्र राणा ने जीती थी। उनके निधन के बाद फरवरी 2016 में हुए उपचुनाव में इमरान मसूद के करीबी कांग्रेस उम्मीदवार पालिकाध्यक्ष माविया अली ने राजेंद्र राणा की पत्नी सपा उम्मीदवार मीना राणा को पराजित कर दिया था। भाजपा उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहा था। दिलचस्प बात यह है कि एक हफ्ता पहले ही माविया अली कांग्रेस छोडकर सपा में चले गए और उम्मीदवार घोषित हो गए। लेकिन यह सीट गठबंधन में कांग्रेस के खाते में चली गई। जिस पर इमरान मसूद ने अपने करीबी मुकेश चौधरी को कांग्रेस टिकट दिला दिया। जिससे माविया अली के फिर से विधायक बनने के अरमानों पर पानी फिर गया। देवबंद सीट पर सभी दलों ने नए उम्मीदवार उतारे है। बसपा ने माजिद अली को और भाजपा ने ब्रिजेश रावत को उम्मीदवार बनाया। रालोद ने भाजपा से आए भूपेश्वर त्यागी को टिकट दिया। इमरान मसूद के गृह क्षेत्र की गंगोह सीट सपा के खाते में गई। वहां पूर्व सांसद चै. यशपाल सिंह के पुत्र इंद्रसैन उम्मीदवार बनाए गए। इस सीट पर इमरान मसूद के बड़े भाई पालिकाध्यक्ष नोमान मसूद कांग्रेस से दावेदार थे। गठबंधन होने से नोमान मसूद और उनके समर्थक बागी तेवर दिखाते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने की ताल ठोक रहे है।

 

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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