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कांग्रेस के दामन में भी मुसलमानों के खून के दाग। सलमान खुर्शीद

नई दिल्ली: वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कल कहा कि उनकी पार्टी के हाथों में खून है और लोगों को उस गलती से सीखना चाहिए।

सोमवार को, श्री खुर्शीद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित कर रहे थे, जब उनसे एक छात्र द्वारा सूचीबद्ध उदाहरणों में से दंगों के बारे में पूछा गया था, जिन्होंने अल्पसंख्यकों को लक्षित किया था। 16वी शताब्दी में बनी बाबरी मस्जिद को ध्वस्त करने के बाद लाखों राइट विंग स्वयंसेवकों द्वारा मुसलमानों की हत्या कर दी गयी थी।

“मैं आपको यह बता रहा हूं, हम अपने हाथों पर खून दिखाने के लिए तैयार हैं ताकि आप समझ सकें कि आपको अपने हाथों पर खून नहीं होना चाहिए। अगर आप उन पर हमला करते हैं, तो आप ही हैं जो आपके हाथों पर दाग पाएंगे। हमारे इतिहास से कुछ सीखें और ऐसी स्थिति न बनाएं … ताकि जब आप 10 वर्षों के बाद एएमयू वापस आएं तो कोई भी आपको यह प्रश्न नहीं पूछेगा, “खुर्शीद ने कहा।

श्री खुर्शीद ने आज कहा कि जब उनकी पार्टी पर हमला किया जा रहा था तो वह वापस नहीं बैठ सके। “मैंने बयान को मानव के रूप में बनाया है। अगर हममें से किसी पर भी कोई जिम्मेदारी है, चाहे वह ऐतिहासिक, राजनीतिक, सामाजिक या दार्शनिक हो, हमें जवाब देना चाहिए; और हम यह करना जारी रखते हैं। क्या आपने कभी मुझे बयान वापस लेने के लिए जाना है? मैं कहना चाहता था कि मैंने क्या कहा, “उन्होंने कहा।

कांग्रेस नेता पीएल पुणिया ने हालांकि स्पष्ट किया कि पार्टी खुर्शीद के बयान से असहमत है। उन्होंने कहा, “हर किसी को पता होना चाहिए कि पूर्व और स्वतंत्रता के बाद, कांग्रेस ही एकमात्र पार्टी है जिसने लोगों के सभी वर्गों को साथ ही साथ धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को ले कर एक समतावादी समाज बनाने की दिशा में काम किया है।”

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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