उत्तर प्रदेश

योगी की चेतावनी, गोरक्षा या ऐंटी रोमियो के मुद्दे पर कानून हाथ में न लें

सीएम बनने के बाद वेस्ट यूपी के पहले दौरे पर गए आदित्यनाथ ने गोरक्षा और एंटी रोमियो के मुद्दे पर लोगों से कानून व्यवस्था को हाथ में न लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों से सख्ती से निपटा जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था का राज हो। धार्मिक सौहार्द का माहौल बनाया जाएगा, लेकिन तुष्टीकरण नहीं किया जाएगा।

मेरठ के भैसाली ग्राउंड में मंगलवार को आयोजित जनसभा में सीएम योगी ने लोगों से अपील की कि वे आवेश में कोई गलत काम न करें। अगर आपके आसपास कुछ गैरकानूनी काम हो रहा है तो उसकी शिकायत पुलिस में कीजिए और उसे उसका काम करने दीजिए। आपको कानून हाथ में लेने की कोई जरूरत नहीं है।’

‘लड़कियों के लिए बना सुरक्षित माहौल’

सीएम योगी ने कहा कि अगर राज्य में गैरकानूनी बूचड़खानों की रिपोर्ट्स मिलती है तो यह कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार एजेंसियों की ड्यूटी है कि वे इस पर कार्रवाई करें।’ सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी के आदेशों की अवहेलना कर बड़े पैमाने पर अवैध बूचड़खाने चल रहे थे। हमने उन पर कार्रवाई की। योगी ने एंटी-रोमियो स्क्वॉड के फैसले की तारीफ की और कहा कि इससे राज्य में लड़कियों के लिए सुरक्षित माहौल बना। सीएम ने लोगों से प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि आज से ही प्लास्टिक का उपयोग बंद कर दें।

‘जहां बेहतर दाम मिलें,वहीं बेचें’

सीएम ने खरखौदा के किसानों से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि किसानों का उत्थान सबसे पहली प्राथमिकता है और यूपी सरकार इसके लिए काम कर रही है। किसान जो पैदावार करता है उसे उसका सही दाम मिलना चाहिए। किसान अब जहां चाहे वहां अपना आलू और गेहूं बेचें। बाजार में सरकारी दर से ज्यादा पैसा मिल रहा है तो वहीं बेचें। इस पर कोई रोक नहीं है।

सीएम के खिलाफ नारेबाजी भी हुई

शेरगढ़ी में ही दलितों का गुस्सा भी देखने को मिला। उन्होंने सीएम के खिलाफ नारेबाजी और तोड़फोड़ की। शेरगढ़ी के बाहर पार्क में अम्बेडकर की प्रतिमा लगी है। लोगों का कहना है कि योगी उसके पास से गुजरे लेकिन मार्ल्यापण नहीं किया। इससे नाराज लोगों ने नारेबाजी की।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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