उत्तर प्रदेश

बसपा ने आंवला संसदीय सीट से कद्दावर नेता रूचि वीरा को मैदान में उतारा

बरेली:(राजेश तिवारी विशेष संवाददाता ) सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने मंगलवार को बसपा की रूचि वीरा की उम्मीदवारी की घोषणा की। इस निर्वाचन क्षेत्र में एक नया चेहरा, वीरा राजनीति के लिए कोई अजनबी नहीं है। बिजनौर की एक पूर्व विधायक, उन्होंने 2014 के उपचुनाव में बिजनौर में सपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और पहली बार विधायक बनी ।


बरेली, आगरा और बसपा के अलीगढ़ डिवीजन के सेक्टर प्रभारी सुनील कुमार चित्तौड़ ने कहा, “रूचि वीरा आंवला  से सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की उम्मीदवार होंगी  वह आंवला में जीत हासिल करेंगी ।”
वर्तमान में आंवला लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व भाजपा के धर्मेंद्र कश्यप करते हैं। 2014 के लोकसभा चुनावों में, बसपा की उम्मीदवार सुनीता शाक्य ने 1.90 लाख वोटों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया था। दिलचस्प बात यह है कि अब तक किसी भी बसपा उम्मीदवार ने संसदीय सीट नहीं जीती है।
रुचि वीरा वैश्य समुदाय से आती है और वैश्य समुदाय के आंवला में लगभग 70,000 मतदाता है
वैश्य समुदाय के बसपा के बरेली जिला कोऑर्डिनेटर नवनीत अग्रवाल ने कहा, “ये हमारे समाज के लिए सम्मान और गर्व की बात है कि पार्टी ने वैश्य समुदाय के एक सदस्य को टिकट दिया है। हम उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए समुदाय के सदस्यों से उन्हे वोट देने की अपील करेंगे।”
बदायूं के जिला अध्यक्ष, बसपा के हेमेंद्र गौतम ने कहा, “रूचि एक मजबूत नेता हैं और उन्होंने अतीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह आंवला में एक नया चेहरा हैं लेकिन राजनीति में एक जाना माना नाम हैं।” बदायूं के दो विधानसभा क्षेत्र – दातागंज और शेखूपुर – आंवला संसदीय सीट का हिस्सा हैं।
वीरा 2005 में आरएलडी के समर्थन से जिला पंचायत बोर्ड की अध्यक्ष चुनी गईं। भाजपा के भारतेन्द्र सिंह द्वारा सीट खाली करने के बाद उन्होंने 2014 में  उपचुनाव लड़ा। उपचुनाव जीतने के बाद वीरा पहली बार बिजनौर से विधायक बनीं। उन्होंने अपने कार्यकाल में बहुत विकास किया बिजनौर के लोगो में वीरा जी की पहचान विकास महिला के रूप मे की जाती है ।
सूत्रों के मुताबिक, वीरा ने बिजनौर संसदीय सीट से सपा से टिकट मांगा था। हालांकि, सपा-बसपा-रालोद गठबंधन  होने के बाद बिजनौर सीट बसपा के पास चली गई। वीरा जी जनवरी में बसपा में शामिल हुईं और उन्हें बिजनौर संसदीय सीट का बसपा प्रभारी बनाया गया। सूत्रों ने दावा किया कि चूंकि पार्टी कार्यकर्ताओं का एक वर्ग उसके खिलाफ था, इसलिए उन्हे बिजनौर सीट के प्रभारी पद से हटा दिया गया। सूत्रों के मुताबिक बिजनौर इकाई में विरोध से बचने के लिए बसपा ने उन्हे आंवला से मैदान में उतारने का फैसला किया।
आंवला से चुनाव लड़ने की “चुनौती” स्वीकार करते हुए, वीरा ने कहा, “मैंने चुनौती स्वीकार कर ली है और मैं आंवला से चुनाव जीत जाऊंगी।”
रूचि वीरा जी राजनेताओं के परिवार से आती है। उनके पति उदयन वीरा बिजनौर जिला पंचायत बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष हैं। उनके ससुर, सत्य वीरा , पूर्व राज्य मंत्री थे और परिवार के बिजनौर में कई शैक्षणिक संस्थान है।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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