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लखनऊ. हिंदू महासभा के पूर्व अध्यक्ष कमलेश तिवारी हत्याकांड हत्याकांड में बिजनौर के मौलाना अनवारूल हक सहित दो मौलानाओं के खिलाफ नामजद

लखनऊ – राजेश तिवारी विशेष संवाददाता: . हिंदू महासभा के पूर्व अध्यक्ष कमलेश तिवारी हत्याकांड (Kamlesh Tiwari Murder ) के संदिग्धों की एक और सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) सामने आ गई है. फुटेज में दो व्यक्तियों के साथ एक महिला भी दिखाई दे रही है. इसमें से एक व्यक्ति के हाथ में एक थैला दिखाई दे रहा है. आशंका जताई जा रही है कि इसी में संदिग्ध हथियार लेकर आए थे जिससे कमलेश की हत्या को अंजाम दिया गया ।

हत्याकांड में बिजनौर के दौ मौलानाओं के खिलाफ नामजद मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया है. हत्या, आपराधिक साजिश की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है.मौलाना मुफ्ती नईम काजमी, मौलाना अनवारूल हक पर एफआईआर दर्ज की गई है. 2016 में दोनों मौलानाओं ने कमलेश के सिर पर 1.5 करोड़ का इनाम रखा था. कमलेश तिवारी की पत्नी किरन ने एफआईआर दर्ज कराई. नाका हिंडोला थाने में दर्ज हुई एफआईआर.

गला रेतकर की हत्या: डॉक्टर

बता दें कमलेश तिवारी को पहले गोली मारे जाने की खबर सामने आई थी, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि कमलेश तिवारी का किसी धारदार हथियार से गला रेता गया था. उधर पुलिस ने मौके से एक रिवाल्वर भी बरामद की है. पुलिस का कहना है कि हत्याकांड को कमलेश तिवारी के ही किसी परिचित ने अंजाम दिया है. वारदात को अंजाम देकर आरोपी फरार हो गया है.

सीएम योगी ने तलब की रिपोर्ट

कमलेश तिवारी की हत्या के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सख्त हुए हैं. घटना के बाद सीएम योगी ने डीजीपी ओपी सिंह और अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी से तत्काल रिपोर्ट तलब करने का निर्देश दिए है. हालांकि, अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी का कहना है कि उनकी हत्या पुरानी रंजिश की वजह से हुई है. मामले में पुलिस जल्द ही खुलासा करेगी.

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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