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8 राज्यों में 11 सीटों पर BJP के राज्यसभा उम्मीदवार घोषित, MP से सिंधिया और महाराष्ट्र से आठवले को टिकट

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 8 राज्यों में ग्यारह सीटों पर अपने राज्यसभा उम्मीदवार घोषित कर दिए है। बीजेपी ने असम, बिहार, गुजरात, झारखंड, मणिपुर, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान से अपने राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा की है। इसके अलावा बीजेपी ने अपने सहयोगी दलों के दो नेताओं को भी राज्यसभा का प्रत्याशी घोषित किया है। रामदास आठवले को बीजेपी ने महाराष्ट्र से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। वहीं, कांग्रेस के बागी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के आज भाजपा में शामिल होते ही पार्टी ने उन्हें राज्यसभा का टिकट दे दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि सिंधिया को बाद में केंद्र में मंत्री भी बनाया जा सकता है।
भाजपा ने कुल 11 में से जहां नौ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं तो दो सीटों पर सहयोगी दलों को मौका
दिया है। झारखंड से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश को टिकट मिला है वहीं गुजरात से रमीलाबेन बारा और अभय भारद्वाज को पार्टी ने मौका दिया है। इसी तरह से महाराष्ट्र की एक सीट से उदयन राजे भोंसले और दूसरी सीट पर सहयोगी दल आरपीआई (ए) के मुखिया और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले को पार्टी ने टिकट दिया है। बिहार से विवेक ठाकुर और असम की एक सीट पर सहयोगी दल बीपीएफ के बुस्वजीत डाइमरी और दूसरी सीट पार्टी नेता भुवनेश्वर कालिता को टिकट दिया है। भाजपा ने मणिपुर की एक सीट से लिएसंबा महाराजा को मैदान में उतारा है। राजस्थान से राजेंद्र गहलोत को टिकट मिला है।
राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने बताया कि अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में उम्मीदवारों के नाम तय किए गए। होली के दिन मंगलवार को हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, थावरचंद गहलोत शामिल हुए थे। बता दें कि 26 मार्च को 17 राज्यों की 55 सीटों पर राज्यसभा चुनाव होने हैं।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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