उत्तर प्रदेश

अपनी ही सरकार के खिलाफ प्रदर्शन पर बैठे भाजपा विधायक, चेतावनी के बावजूद की योगी आदित्य नाथ के खिलाफ टिप्पणी


उत्तर प्रदेश के बलिया स्थित बैरिया क्षेत्र से भाजपा के विधायक सुरेंद्र सिंह शनिवार (13 मई) को अपनी ही सरकार के अधिकारियों पर लालफीताशाही एवं भ्रष्टाचार का गम्भीर आरोप लगाते हुए सड़क पर उतर आए तथा मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शन किया और अनशन की चेतावनी दी। भाजपा से बैरिया से पहली बार चुनाव जीते सुरेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चेतावनी से बेपरवाह भाजपा विधायक ने आज अपनी ही सरकार के अधिकारियों के खिलाफ ना सिर्फ मोर्चा खोल दिया, बल्कि उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ भी टिप्पणी करने से परहेज नहीं किया।

सिंह ने अपने विधानसभा क्षेत्र में हर साल आने वाली बाढ़ को रोकने के लिये बजट आवंटित होने के बावजूद काम शुरू ना किए जाने के विरोध में बड़ी संख्या में अपने समर्थकों के साथ दूबेछपरा से टेंगरही तक करीब सात किलोमीटर लम्बी मानव श्रृंखला बनाकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया।

इस मौके पर विधायक सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत में प्रदेश की भाजपा सरकार तथा जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र की डेढ़ लाख आबादी हर साल गंगा तथा घाघरा नदी की बाढ़ से परेशान होती है। प्रदेश शासन ने बाढ़ से बचाव के लिये 29 करोड़ रुपये की कार्ययोजना स्वीकृत की है, लेकिन लूट खसोट की मानसिकता के चलते अधिकारी काम शुरू नहीं कर रहे हैं।

सिंह ने बताया कि वह इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर सिंचाई मंत्री, विभागीय अधिकारियों तथा जिला प्रशासन के उच्चाधिकारियों से कई बार मिल चुके हैं, लेकिन इसका कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला है। मुख्यमंत्री योगी ने भी इस मामले में अपेक्षित कदम नहीं उठाया। उन्होंने आगाह किया कि अगर एक सप्ताह में कार्य शुरू नहीं हुआ तो वह 24 मई को भूख हड़ताल शुरू करेंगे।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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