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अभिषेक बच्चन को 12 बार ऑफर हुई थी ‘लगान’, इस वजह से ठुकरा दी थी एक्टर ने फिल्म

22 Years Of Lagaan: डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर (Ashutosh Gowariker) की फिल्म ‘लगान’ (Lagaan) 15 जून, 2001 को रिलीज हुई थी. फिल्म की रिलीज को आज 22 साल हो गए हैं. इस फिल्म ने बॉक्स-ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े थे. फिल्म में सुपरस्टार आमिर खान (Aamir KHan) लीड रोल में थे, लेकिन क्या आपको पता है आमिर से पहले यह फिल्म अभिषेक बच्चन को ऑफर की गई थी, वह एक-दो बार नहीं बल्कि 12 बार. लेकिन अभिषेक ने हर बार इस फिल्म को करने से मना कर दिया था. सिर्फ अभिषेक ही नहीं, आमिर से पहले यह फिल्म शाहरुख खान को भी ऑफर की गई थी, लेकिन उन्होंने भी इस फिल्म को करने से मना कर दिया था.

आशुतोष का बयान

साल 2001 में आशुतोष ने रेडिफ से बात करते हुए बताया था कि अभिषेक को यह फिल्म अच्छी लगी थी, लेकिन जब उन्होंने अभिषेक को यह फिल्म ऑफर की थी तब उनका करियर जेपी दत्ता की रिफ्यूजी से लॉन्च होने की तैयारी में था. उन्होंने कहा कि उन परिस्थितियों में उनका फैसला सही था. अगर वह लगान करते तो यह उनकी पहली फिल्म बन जाती.

अभिषेक ने क्यों किया मना

कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिषेक का सोचना था कि वह लगान के लिए सही नहीं थे और इसीलिए उन्होंने यह फिल्म नहीं की थी. उन्होंने कहा था- मुझे यकीन था कि मैं इस फिल्म के लिए सही नहीं हूं. मैं ऐसा एपिक रोल करने के लिए अभी कच्चा और यंग था. मुझे पता था कि यह बहुत बड़ी हिट होने वाली है, लेकिन मैं उस रोल के लिए तैयार नहीं था.

उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें अब लगान ऑफर किया गया होता तो क्या वह अब इस फिल्म को करते? इस पर अभिषेक ने कहा- ”मुझे खुशी है कि आमिर ने वह फिल्म की थी. उन्होंने मैजिक क्रिएट कर दिया था. सभी फिल्म और रोल की अपनी किस्मत होती है.क्या आपको पता है मार्लन ब्रैंडो से पहले कितने एक्टर्स को गॉडफादर ऑफर की गई थी ? हम क्यों इस बारे में बात कर रहे हैं?”

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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