उत्तर प्रदेश

बिजनौर जनपद को खुले में शौच मुक्त कराने पर DM होंगे सम्मानित

(फैसल खान ब्यूरो चीफ SBT बिजनौर): बिजनौर जनपद में खुले में शौच मुक्त कार्यक्रम मनाया जा रहा है जिस पर ग्राम ग्राम में जाकर लोगों को समझाया जा रहा है कि खुले में शौच करने का भयंकर परिणाम हो सकता है जिस पर एक टीम जिलाधिकारी महोदय ने बनाकर स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ग्रामीण में भेजी जो टीम ग्रामवासियों को खुले में शौच मुक्त करने के लिए समझा रही है और इस कार्यक्रम को सफल बना रही है पूर्व जिलाधिकारी महोदय ने खुले में शौच मुक्त कार्यक्रम को सफल बनाने का बीड़ा उठाया था मगर किसी कारणवश उन्हें बिजनौर शहर से बाहर जाना पड़ा मगर माननीय जगत राज जी ने स्वच्छ भारत मिशन को आगे बढ़ाते हुए जनपद को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रखा है इस पर्व ने लखनऊ में अंतर्गत वित्तीय सहयोग से ताज होटल लखनऊ में आयोजित एक दिवसीय में जिले को खुले में शौच मुक्त बनाने में महत्त्वपूर्ण निभाने पर जिलाधिकारी बिजनौर तथा नवीन तत्कालीन जिलाधिकारी को सम्मानित व पुरस्कृत किया जाएगा मान्य जगतराज जी ने जानकारी देते बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिला अधिकारियों एवं मुख्य विकास अधिकारी की एक मीटिंग लखनऊ में ताज होटल में आयोजित की जाएगी जिसमें जिले को स्वच्छ खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए सारणी काम करने में सहयोग करने वाले जिला अधिकारी अमित सचिव उत्तर प्रदेश द्वारा जिलाधिकारी बिजनौर जगतराज सुजीत कुमार तत्कालीन जिलाधिकारी शामली जिलाधिकारी देवरिया श्रीमती व्ही चंद्रकला जिलाधिकारी बिजनौर वर्तमान उपसचिव स्वच्छ मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली श्रीमती तथा कंचन वर्मा और जिलाधिकारी गाजियाबाद को भी सम्मानित किया जाएगा जिलाधिकारी महोदय ने बताया कि बिजनौर को प्राप्त होने वाले इस उपलब्धि पर शौच मुक्त कार्यक्रम में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे और सभी अधिकारी कर्मचारियों को बधाई देते हैं कि उन्होंने बहुत ही सराहनीय कार्य किया है और खुले में शौच मुक्त कार्यक्रम को सफल बनाया है

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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