उत्तर प्रदेश

बिजनौर: अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान टलवाने में कामयाब रहे जिला पंचायत अध्यक्ष

(फैसल खान ब्यूरो चीफ SBT बिजनौर): बिजनौर(राजनीति की शतरंज पर जिलापंचायत अध्यक्ष उदयन वीरा फिर से विरोधियों को मात देने में कामयाब हो गये हालांकि इस चाल से उन्हें मात्र कुछ दिनों की ही मोहलत मिल पायेगी। पंचायत अध्यक्ष की कथित अस्वस्थता के चलते जिला प्रशासन ने आज अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाले मतदान की तिथि को 22 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया है। आहत विपक्षी सदस्यों ने तिथि बढ़ाये जाने को लेकर हंगामा भी किया।

सत्ता परिवर्तन के बाद साकेन्द्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में एक जुट हुए पंचायत सदस्यों ने वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष उदयन वीरा को हटाने की मुहिम शुरू की और एक माह पूर्व 36 सदस्यों के शपथ पत्रों सहित जिलाधिकारी के समक्ष उपस्थित हुए। योजना समिति की बैठक का हवाला देते हुए जिलाधिकारी ने उक्त सभी को कुछ दिनों के लिए टाल दिया था। 4 जुलाई को पुनः 35 सदस्यों ने पंचायत अध्यक्ष के विरूद्ध अविश्वास व्यक्त करते हुए अपने शपथ पत्र जिलाधिकारी को सौंपे जिसपर मतदान के लिए 31 जुलाई निर्धारित की गयी थी। पंचायत अध्यक्ष ने इस बीच बचाव के लिए सूचना प्रारूप त्रुटिपूर्ण बताते हुए हाई कोर्ट में अपील भी दायर की थी परंतु वहां से राहत नहीं मिली। सोमवार को निर्धारित समय पर साकेन्द्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में 33 सदस्य कलेक्ट्रेट पहुंच गये इसी बीच बताया जाता है कि जिला पंचायत अध्यक्ष की ओर से अस्वस्थता के चलते मिटिंग में न पहुंच पाने की सूचना व बाद की कोई तिथि दिये जाने संबंधी पत्र पर पीठासीन अधिकारी ने आज की कार्यवाही को स्थगित करते हुए 22 अगस्त की तिथि निश्चित कर दी। अब उक्त अविश्वास प्रस्ताव पर 22 अगस्त को मतदान होगा. हालांकि इस बात को लेकर विपक्षी सदस्यों ने कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में भारी हंगामा किया और जल्दी की तारीख देने की मांग की। समाचार लिखे जाने तक सभा कक्ष में विपक्षी सदस्यों की बैठक जारी है।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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