उत्तर प्रदेश

बिजनौर में जिले की आठ विधानसभा सीटों पर 120 सूरमाओं ने चुनाव के लिए ताल ठोक दी

  शमीमुर्रहमान (जिला प्रभारी बिजनौर) बिजनौर में जिले की आठ विधानसभा सीटों पर 120 सूरमाओं ने चुनाव के लिए ताल ठोक दी है। बड़े दलों का खेल बिगाड़ने के लिए 20 निर्दलीय व 20 छोटे दलों के प्रत्याशी भी मैदान में कूद गए हैं। सभी ने अपने पर्चे भर दिए हैं।
अनुमान लगाया जा रहा है कि निर्दलीय व छोटे दलों के  प्रत्याशी बड़े दलों का खेल बिगाड़ सकते हैं। बड़े दलों के नेता छोटे दलों के साथ निर्दलियों को मैदान से हटाने का प्रयास भी कर रहे हैं। नाम वापसी के दिन पता चलेगा कि किस प्रत्याशी ने चुनावी रण छोड़ा है। अभी तो सभी मैदान में डटे रहने का दम भर रहे हैं।
सबसे ज्यादा 23 प्रत्याशी बढ़ापुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान  में हैं। 12 प्रत्याशी से कम किसी भी विधानसभा क्षेत्र में नहीं हैं। बिजनौर विधानसभा क्षेत्र में 13 प्रत्याशियों में से चार निर्दलीय व छोटे दलों के पांच प्रत्याशी हैं। नहटौर विधानसभा क्षेत्र के 12 प्रत्याशियों में से तीन निर्दलीय व चार छोटी पार्टियों के प्रत्याशी हैं। धामपुर के 13 प्रत्याशियों में से पांच निर्दलीय व चार छोटी पार्टियों के  हैं। नजीबाबाद विधानसभा क्षेत्र  के 18 प्रत्याशियों में से पांच निर्दलीय व नौ छोटी पार्टियों के हैं। नगीना के 15 प्रत्याशियों में से चार निर्दलीय व छह छोटे दलों के  हैं। चांदपुर के 12 प्रत्याशियों में से पांच निर्दलीय व दो छोटे दलों      के हैं। नूरपुर विधानसभा क्षेत्र के 14 प्रत्याशियों में से पांच निर्दलीय व छह छोटे दलों के हैं। बढ़ापुर के 23 प्रत्याशियों में से 14 निर्दलीय व चार छोटे दलों के प्रत्याशी हैं। छोटे दलों के नेता व निर्दलीय अपने प्रभाव से अपनी जाति के वोट काटने में कामयाब हो जाते हैं। कुछ निर्दलीय व छोटे दलों को बड़े दलों के प्रत्याशी डमी कैंडिडेट के रूप में मैदान में उतारते हैं।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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