उत्तर प्रदेश

बिजनौर:विधानसभा चुनाव में भाजपा को छोड़कर सभी दलों ने मुस्लिमों पर दांव खेला है

  शमीमुर्रहमान (जिला प्रभारी बिजनौर) बिजनौर में जिले की छह सामान्य सीटों पर विभिन्न दलों के साथ निर्दलीय व छोटे दलों से 25 मुस्लिम प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ये कड़ी टक्कर देकर समीकरण बिगाड़ रहे हैं। हर सीट पर कई मुस्लिम प्रत्याशी चुनाव मैदान में डटे हैं। दूसरे प्रत्याशियों की मुस्लिम प्रत्याशियों ने नींद उड़ा दी है।
 
विधानसभा चुनाव में भाजपा को छोड़कर सभी दलों ने मुस्लिमों पर दांव खेला है। बसपा ने तो सभी छह सामान्य सीटों पर मुस्लिमों पर ही दांव खेला है। बिजनौर में विधानसभा सीट पर तीन मुस्लिम प्रत्याशी हैं। रशीद अहमद छिद्दू बसपा के टिकट से चुनावी मैदान में हैं। परवेज अकील ऑल इंडिया माइनोरिटी फ्रंट के प्रत्याशी हैं तो रफीक अहमद निर्दलीय चुनावी मैदान में हैं। नजीबाबाद विधानसभा सीट पर बसपा से जमील अहमद अंसारी, सपा से विधायक तसलीम अहमद चुनाव लड़ रहे हैं। अशफाक अपना देश पार्टी, मोहम्मद उमर गरीब क्रांति पार्टी व ताजिम सिद्दीकी एआईएमआईएम से चुनाव लड़ रहे हैं। नूरपुर विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी गौहर इकबाल, सपा के नईमुल हसन, पीस पार्टी से महबूब चुनावी मैदान में हैं।
धामपुर में बसपा विधायक मोहम्मद गाजी, रालोद से नईमुद्दीन, अंबेडकर नेशनल कांग्रेस पार्टी से फिरासत व निर्दलीय मोहम्मद दानिश चुनाव में ताल ठोक रहे हैं। चांदपुर विधानसभा सीट से बसपा से विधायक मोहम्मद इकबाल, सपा से अरशद अंसारी, कांग्रेस से शेरबाज पठान, पीस पार्टी से फरमान व निर्दलीय इलियास सभी को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। बढ़ापुर विधानसभा से कांग्रेस के हुसैन अहमद अंसारी, बसपा से फहद यजदानी, निर्दलीय आबिद अंसारी, ताहिर हुसैन, गजाला तौसिफ चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। मुस्लिम प्रत्याशियों ने अन्य प्रत्याशियों के माथे पर बल ला दिए हैं। नहटौर और नगीना दो विधानसभा सीट सुरक्षित हैं।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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