उत्तर प्रदेश

बिजनौर में विधान सभा चुनाव के लिए नामजदगी के पांचवें दिन 11 प्रत्याशियों ने पर्चे दाखिल किए

बिजनौर में विधान सभा चुनाव के लिए नामजदगी के पांचवें दिन 11 प्रत्याशियों ने पर्चे दाखिल किए। सपा, भाजपा और बसपा के दो-दो प्रत्याशी पर्चा दाखिल करने वालों में शामिल रहे। पर्चा दाखिल करने के दौरान भारी गहमागहमी रही। अब तक 24 प्रत्याशी अपने पर्चे दाखिल कर चुके हैं।
कलक्ट्रेट में नामांकन पत्र जमा करते चांदपुर विधान सभा से सपा प्रत्याशी अरशद अंसारी
मंगलवार को बिजनौर विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी राहुल कुमार, भारतीय मोमिन फ्रंट के प्रत्याशी भूपेंद्र सिंह ने पर्चा दाखिल किया। चांदपुर सीट पर सपा प्रत्याशी अरशद अंसारी व भारत की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी अमर सिंह ने अपना पर्चा भरा।  नगीना सीट पर भाजपा प्रत्याशी ओमवती, सपा प्रत्याशी मनोज पारस, बसपा प्रत्याशी वीपी सिंह, धामपुर सीट पर बसपा प्रत्याशी मोहम्मद गाजी. निर्दलीय दानिश, नूरपुर सीट पर भाजपा प्रत्याशी लोकेंद्र चौहान, नजीबाबाद सीट पर संपूर्ण समाज पार्टी के प्रत्याशी संपूर्णानंद पांडे ने अपना पर्चा दाखिल किया। मोहम्मद गाजी, लोकेंद्र चौहान, वीपी सिंह, ओमवती, मनोज पारस अपने समर्थकों के साथ पर्चा दाखिल करने आए थे। प्रस्तावकों के साथ प्रत्याशियों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर अपना पर्चा दाखिल किया।  मनोज पारस सपा कार्यालय से अपने समर्थकों के साथ पर्चा दाखिल करने कलक्ट्रेट पहुंचे। पांचवें दिन भी पर्चा दाखिल कराने के दौरान कलक्ट्रेट में भारी गहमागहमी रही। विकास भवन के बाहर बैरियर पर प्रत्याशियों के समर्थक खूब नारेबाजी करते रहे। कई बार पुलिस को उन्हें शांत करना पड़ा।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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