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नीतीश कुमार कैबिनेट: किस मंत्री को मिला कौन सा विभाग, यहां पढ़‍िए पूरी लिस्‍ट

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी दो दिन पुरानी सरकार का ना केवल विस्तार किया है बल्कि सभी नवनियुक्त मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया है। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को फिर से वित्त एवं वाणिज्य मंत्री बनाया गया है। विधानसभा में भाजपा के विधायक दल के नेता प्रेम कुमार को नीतीश ने नया कृषि मंत्री बनाया है। कई मंत्रियों को नीतीश ने पुराने विभाग का जिम्मा थमाया है, जबकि कुछ का विभाग बदला है। बते दें कि शनिवार (29 जुलाई) की शाम पटना के राजभवन में राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने नवनियुक्त 26 मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई थी। मंगल पांडे को बाद में देर शाम शपथ दिलाई गई। उन्हें स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा सौंपा गया है।

नीतीश कुमार- मुख्यमंत्री, गृह, सामान्य प्रशासन, कार्मिक विभाग और अन्य जो किसी को नहीं
सुशील कुमार मोदी- वित्त, वाणिज्य, वन एवं पर्यावरण और आईटी

विजेंद्र यादव- ऊर्जा, उत्पाद व मद्य निषेध
डॉ. प्रेम कुमार- कृषि
नंदकिशोर यादव– पथ निर्माण

मंगल पांडेय- स्वास्थ्य
ललन सिंह- जल संसाधन, योजना विकास
श्रवण कुमार- ग्रामीण विकास, संसदीय कार्य
राम नारायण मंडल- राजस्व व भूमि सुधार
जय कुमार सिंह- उद्योग व विज्ञान प्रावैधिकी
प्रमोद कुमार- पर्यटन
कृष्ण नंदन वर्मा- शिक्षा
महेश्वर हजारी- भवन निर्माण
विनोद नारायण झा- पीएचईडी
शैलेश कुमार- ग्रामीण कार्य
सुरेश शर्मा- नगर विकास एवं आवास
मंजू वर्मा- समाज कल्याण
विजय कुमार सिन्हा- श्रम संसाधन
संतोष कुमार निराला- परिवहन
राणा रणधीर सिंह- सहकारिता
खुर्शीद आलम- अल्पसंख्यक कल्याण व गन्ना उद्योग
विनोद सिंह- खान व भूतत्व
मदन सहनी- खाद्य एवं उप्भोक्ता
कपिल देव कामत- पंचायती राज
दिनेशचंद्र यादव- लघु सिंचाई, आपदा प्रबंधन
रमेश ऋषिदेव- अनुसूचित जनजाति
पशुपति कुमार पारस- पशु एवं मत्स्य पालन
कृष्ण कुमार ऋषि- कला संस्कृति
बृज किशोर बिंद – पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा विभाग

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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