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Bigg Boss OTT 3: पायल मलिक के बेघर होते ही बेकाबू हुआ अरमान मलिक का गुस्सा, विशाल पांडे को कह दिया ‘मच्छर है तू’

बिग बॉस ओटीटी 3 (Bigg Boss OTT 3) में एपिसोड दर एपिसोड जबरदस्त हंगामा देखने को मिल रहा है। शो के बीते एपिसोड में देखने को मिला कि पायल मलिक को घर से बेघर कर दिया गया, जो घरवालों के साथ-साथ फैंस के लिए भी बहुत शॉकिंग था। शो को शुरू हुए दो हफ्ते पूरे हो चुके हैं और शुरुआत से ही घरवाले के बीच काफी अनबन और लड़ाई-झगड़े देखने को मिल रहे हैं। अब हाल ही में बिग बॉस ओटीटी 3 से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल शो में अरमान मलिक और विशाल पांडे के बीच बड़ा झगड़ा हो गया है, जिससे घर का माहौल बिगड़ गया है।

अरमान मलिक ने विशाल पांडे को कहा ‘मच्छर’

दरअसल विशाल और अरमान के झगड़े की शुरुआत पायल मलिक के इविक्शन के बाद हुई। शो के दौरान अरमान मलिक विशाल को सुझाव देते हुए कहते हैं कि वह हमेशा दूसरों के काम की नकल करते हैं, उन्हें अपना कुछ बनाना चाहिए। केवल इतना ही नहीं अरमान मलिक ने विशाल को चिढ़ाने के लिए टिकटॉक पर उनके फेमस डांस वीडियो ‘कच्चा बादाम’ की नकल भी की। अरमान मलिक की यह बात सुनकर विशाल पांडे बुरी तरह से भड़क जाते हैं और गुस्से में अरमान मलिक का फोन छुपा लेते हैं। जिसके बाद अरमान मलिक भी गुस्से में विशाल पांडे को मच्छर कह देते हैं, जिसके बाद विशाल पांडे और अरमान मलिक के बीच जबरदस्त बहस होने लगती है।

विशाल पांडे ने अरमान मलिक को दी धमकी

इस झगड़े के बाद विशाल पांडे अरमान मलिक को धमकी देते हुए कहते हैं, “एक बार फिर से मेरे कंटेंट पर बोलकर दिखाना, फिर बताता हूं तुझे।” बता दें कि विशाल पांडे और अरमान मलिक के बीच शुरुआत से ही कुछ भी ठीक नहीं है। दोनों के हर बार किसी ना किसी बात को लेकर झगड़े होते हैं। विशाल और अरमान के अलावा शिवानी और पौलोमी के बीच भी काफी लड़ाइयां होती हैं। तो वहीं सना मकबूल और साई केतन राव की भी बिल्कुल नहीं बनती। इसके अलावा रणवीर शौरे की भी विशाल पांडे के साथ रस्साकसी देखने को मिल जाती है। बता दें कि पायल और नीरज गोयत के इविक्शन के बाद अब बिग बॉस हाउस में केवल 14 लोग बचे हैं।

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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