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Bigg Boss OTT 3: जंग का मैदान बना बिग बॉस हाउस, खाने को लेकर आपस में भिड़े साई केतन राव और सना मकबूल

अनिल कपूर (Anil Kapoor) के फेमस रियलिटी शो बिग बॉस ओटीटी 3 (Bigg Boss OTT 3) की शुरुआत हो चुकी है। शो में इस सीजन इंफ्लुएंसर्स ने बाजी मारी है। लव कटारिया, विशाल पाडें और अरमान मलिक समेत कई इंफ्लुएंसर्स इस सीजन बिग बॉस का हिस्सा बने हैं। अब इसी बीच घर में कैद सभी 16 कंटेस्टेंट्स के बीच लड़ाई-झगड़े भी शुरू हो गए हैं। दरअसल बिग बॉस ओटीटी 3 का नया प्रोमो वीडियो सामने आया है, जिसमें साई केतन राव और सना मकबूल आपस में झगड़ते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि साई और सना खाने को लेकर एक-दूसरे से झगड़ रहे हैं।

अंड़ों को लेकर हुआ साई केतन राव और सना का झगड़ा

दरअसल अंडे को लेकर साई केतन राव और सना मकबूल आपस में झगड़ते दिखे। बिग बॉस ओटीटी 3 के इस नए प्रोमो वीडियो में देखने को मिल रहा है कि साई केतन राव कहते हैं कि मैं रोजाना अंड़े और कुछ सब्जियां खाऊंगा। इसके बाद वह कहते हैं कि वह दो से ज्यादा अंडे खाएंगे क्योंकि दो अंड़ों में उनका पेट नहीं भर पाएगा। हालांकि साई की बातें सुनकर सना मकबूल बुरी तरह से भड़क जाती हैं। केवल इतना ही नहीं साई केतन राव वीडियो में यह भी कहते दिख रहे हैं कि सना मकबूल बिग बॉस नहीं है, जो वह उनकी बातों को मानेंगे। सना भी साई से खूब बहस करती हैं।

झगड़े के बाद इमोशनल हुए साई केतन राव

सना मकबूल से झगड़े के बाद साई केतन राव बुरी तरह से टूट जाते हैं और इमोशनल होकर रोने लगते हैं। इस दौरान वह दीपक चौरसिया से अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा बड़ा राज बताते हैं। वह कहते हैं, “मेरे परिवार का फिल्मों से कोई कनेक्शन नहीं है। मैं अपने दम पर आज यहां खड़ा हूं। हम एक मीडिल क्लास परिवार से हैं और मेरी पहली सैलरी 100 रुपये थी, जिसमें मैंने हीरो के भाई का किरदार निभाया था। इसके बाद मैंने तमिल सीरीज की। कोविड में मैंने सबकुछ खो दिया था। मेरे पास ना तो पैसे बचे थे और ना ही मौके। ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरी सारी दुनिया खत्म हो गई है।”

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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