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Bigg Boss OTT 3: घरवालों पर फूटा पायल मलिक का गुस्सा, बोलीं- ‘वोटिंग की वजह से बाहर नहीं हुई बल्कि…’

बिग बॉस ओटीटी 3 (Bigg Boss OTT 3) में जबरदस्त ड्रामा देखने को मिल रहा है। शो के दूसरे हफ्ते में पायल मलिक (Payal Malik), लवकेश कटारिया (Lovekesh Kataria) और शिवानी कुमारी पर एलिमिनेशन की तलवार लटकी थी, जिसमें से पायल मलिक को घर से बेघर कर दिया गया। वीकेंड का वार में अनिल कपूर ने पायल मलिक के एलिमिनेशन की घोषणा की, जो घरवालों के साथ-साथ फैंस के लिए भी काफी शॉकिंग था। अब घर से बेघर होते ही पायल मलिक ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में पायल मलिक का गुस्सा घरवालों पर फूट रहा है।

पायल मलिक ने घरवालों पर लगाया उनके इविक्शन का आरोप

इस वीडियो में पायल मलिक घरवालों पर उनके इविक्शन का इल्जाम लगाती नजर आ रही हैं। वीडियो में पायल मलिक कह रही हैं, “हेलो एवरीवन, थैंक्यू सो मच, आप लोगों ने मुझे बहुत सपोर्ट किया और आप सबको पता है कि मैं बाहर आ चुकी हूं बिग बॉस हाउस से। लेकिन इतना प्यार देने के लिए, इतना सपोर्ट देने के लिए थैंक्यू सो मच। मुझे पता है कि मैं वोटिंग की वजह से बाह नहीं आई हूं बल्कि घरवालों की वजह से बाहर आई हूं। क्योंकि घरवालों ने मुझे जो नॉमिनेट किया था, उस वजह से मैं बाहर आई हूं। वरना मैं बहुत अच्छा खेल रही थी, अगर मैं घर में रहती तो और भी अच्छा खेलती। और जैसी मैं थी वैसी ही दिख रही थी सब लोगों को। मुझे हमेशा ऐसे ही सपोर्ट करना।”

पायल मलिक का वीडियो

पायल मलिक के इविक्शन से खुश हैं अरमान मलिक

बिग बॉस ओटीटी 3 का एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल बिग बॉस का यह वीडियो वीकेंड का वार के दौरान का है। इस वीडियो में अनिल कपूर अरमान मलिक से पूछते हैं कि अगर पायल आज यहां से चली जाती हैं तो आपको क्या लगता है कि क्या होगा? तो इस अरमान मलिक कहते हैं कि कुछ नहीं होगा ये तो अच्छी बात है कि पायल बाहर जाएगी क्योंकि घर में 4 बच्चे हैं, संभाल लेगी। ऐसा तो कोई काम है नहीं यहां पर

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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