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Bigg Boss OTT 3: इन 5 कंटेस्टेंट्स पर गिरी नॉमिनेशन की गाज, पहले हफ्ते कोई एक होगा घर से बेघर

फेमस कंट्रोवर्शियल शो बिग बॉस ओटीटी 3 (Bigg Boss OTT 3) की धमाकेदार शुरुआत हो चुकी है। इस सीजन बिग बॉस में इंफ्लुएंसर्स का दबदबा है। शो में फेमस यूट्यूबर अरमान मलिक (Armaan Malik), पायल मलिक (Payal Malik), विशाल पांडे के साथ ही सना मकबूल, सना खान, साई केतन राव, दीपक चौरसिया और लव कटारिया ने भी धमाकेदार एंट्री मारी है। बिग बॉस ओटीटी 3 का घर दूसरे दिन ही जंग का मैदान बन गया था। शो में दूसरे दिन पहले विशाल और पौलमी के बीच झगड़ा हुआ, उसके बाद साई केतन राव और सना मकबूल के बीच तगड़ी फाइट हुई। अब इसी बीच शो से एक बड़ी खबर सामने आ गई है। दरअसल शो में पहला नॉमिनेशन टास्क हो चुका है, जिसमें 5 घरवालों को घर से बेघर होने के लिए नॉमिनेट किया गया है।

5 कंटेस्टेंट्स पर लटकी नॉमिनेशन की तलवार

बिग बॉस ओटीटी 3 (Bigg Boss OTT 3) में पहले नॉमिनेशन की प्रक्रिया हुआ, जिसमें 16 में से 5 कंटेस्टेंट्स के सिर पर नॉमिनेशन की तलवार लटक गई है। ‘बिग बॉस ओटीटी 3’ का पहला नॉमिनेशन आज के एपिसोड में दिखाया जाएगा। नॉमिनेशन टास्क का प्रोमो वीडियो जियो सिनेमा के इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर किया गया है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कंटेस्टेंट्स एक-दूसरे पर भड़ास निकल रहे हैं। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि पहला नॉमिनेशन शिवानी कुमारी कर रही हैं और वह नॉमिनेट करते समय कंटेस्टेंट पर माइंड गेम खेलने का आरोप लगाती हैं, उसके बाद पायल मलिक घर में हुए झगड़े की बेस पर किसी एक घरवाले को नॉमिनेट करती हैं।

घर से बेघर होने के लिए नॉमिनेट हुए ये 5 कंटेस्टेंट्स

बता दें कि इस हफ्ते घर से बेघर होने के लिए 5 कंटेस्टेंट्स नॉमिनेट हुए हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो लव कटारिया, विशाल पांडे, शिवानी कुमारी, चंद्रिका दीक्षित और दीपक चौरसिया भी घर से बेघर होने के लिए नॉमिनेट हुए हैं। ऐसे में देखना होगा कि बिग बॉस ओटीटी 3 (Bigg Boss OTT 3) के पहले हफ्ते कौन बेघर होगा। बताते चलें कि बिग बॉस (Bigg Boss) का यह सीजन सलमान खान नहीं बल्कि एक्टर अनिल कपूर होस्ट कर रहे हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि शो में घरवालों को मोबाइल फोन रखने की इजाजत दे दी गई है।

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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