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सुंबुल के अब्बा ने टीना दत्ता की मां से मांगी माफी

Bigg Boss 16: छोटे पर्दे का रिएलिटी शो बिग बॉस 16 की सबसे महंगी कंटेस्टेंट सुंबुल तौकीर खान इन दिनों चर्चा का विषय बन गई हैं। हाल ही में बिग बॉस ने सुंबुल तौकीर खान की उनके पिता से बात करवाई थी। इस दौरान सुंबुल के पिता ने शलीन भनोट को जमकर फटकारा था। वहीं उनके पिता ने टीना दत्ता की भी क्लास लगाई थी। इसके बाद शालीन के पिता ने मीडिया से बातचीत की, जिसमें उन्होंने सुंबुल के अब्बा को जमकर ट्रोल किया। वहीं टीना दत्ता की मां ने भी एक सोशल मीडिया पर एक वीडियो डालकर सुंबुल के पिता को लताड़ लगाई थी। वहीं अब उनके पिता ने टीना दत्ता की मां से मांफी मांगी।

सुंबुल तौकीर खान के पिता ने कही ये बात

सुंबुल तौकीर खान ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘सबसे पहले तो मैं टीना की माता जी से हाथ जोड़कर माफी मांगना चाहता हूं। मैं दवा के प्रभाव में था कृप्या मुझे माफ कर दें। लेकिन उन्हें उनकी बेटी टीना को भी समझाना चाहिए कि वो मेरी बेटी के लिए पीठ पीछे ऐसी बाते ना करें। टीना का साथ उनके कई अच्छे दोस्तों ने छोड़ दिया हैं और वे लोग सुंबुल को सपोर्ट कर रहे हैं।’ Also Read – Bigg Boss 16: सुंबुल का साथ देने सलमान के घर में पहुंचे फहमान खान, शालीन भनोट की लगाएंगे क्लास!

सुंबुल के पिता ने फैंस से की दरख्वास्त

सुंबुल के पिता ने ‘Tellychakkar’ से बात करते हुए फैंस से एक अपील की है। उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि ‘उनकी बेटी हर बार नॉमिनेट होगी और आप सभी उनको हर बार बचा लेंगे। लेकिन इस बार मेरी आपसे ये दरख्वास्त है कि आप उन्हें वोट ना करें क्योंकि मैं नहीं चाहता कि उस जंगल में मेरी बेटी खो जाए। मैं नहीं चाहता कि आपकी इमली इस भीड़ में कही खो जाए। मालूम हो कि इस हफ्ते के लिए अर्चना गौतम, सौंदर्या शर्मा, अंकित गुप्ता, सुंबुल तौकीर खान और एमसी स्टेन नॉमिनेट है। अब देखना ये दिलचस्प होगा कि कौन इस वीकेंड घर से बेघर होता है।

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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