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‘विक्की डोनर’ से पहले रियल लाइफ में स्पर्म डोनेट कर चुके हैं आयुष्मान खुराना, एक्टर ने खुद किया

Vicky Donor 2: आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) बॉलीवुड के सक्सेसफुल स्टार हैं. वह लीक से हटकर फिल्मों में नजर आते हैं, जिन्हें उनके फैंस बहुत पसंद करते हैं. एक्टर ने आज से 10 साल पहले फिल्म विक्की डोनर (Vicky Donor) से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसमें उन्होंने एक ऐसे लड़के का किरदार निभाया था जो पैसों के लिए स्पर्म डोनेशन का काम करता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि आयुष्मान खुराना रियल लाइफ में भी स्पर्म डोनेट कर चुके हैं.

आयुष्मान खुराना ने किया ये खुलासा

आयुष्मान खुराना ने एक न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान ये खुलासा किया. आयुष्मान ने अपनी डेब्यू फिल्म ‘विक्की डोनर’ के सीक्वल को लेकर बात की. उन्होंने कहा कि ‘विक्की डोनर 2’ बननी चाहिए. क्योंकि उन्हें जानना है कि उनके 40-50 बच्चे क्या कर रहे हैं. इसके बाद उन्होंने बताया कि वह रियल लाइफ में भी स्पर्म डोनेट कर चुके हैं. 

टास्क पूरा करने के लिए किया स्पर्म डोनेट

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एक्टर ने बताया कि एमटीवी रोडीज के ऑडिशन के दौरान उन्हें स्पर्म डोनेट का टास्क मिला था और उन्होंने इस टास्क को पूरा किया था. आयुष्मान ने टास्क जीतने के इलाहाबाद में स्पर्म डोनेट किया था. बता दें कि रोडीज शो में पहुंचे कई कैंडिडेट्स को ये टास्क दिया गया था, लेकिन कई लोगों ने मना कर दिया. कुछ ही लोगों ने इस टास्क एक्सेप्ट किया और पूरा करके दिखाया था और इसमें आयुष्मान खुराना भी शामिल थे.

नहीं दिखा पाई ‘एन एक्शन हीरो’ कमाल

गौरतलब है कि आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) की हाल ही में फिल्म एन एक्शन हीरो रिलीज हुई है, जिसमें उन्होंने एक पॉपुलर एक्टर का रोल प्ले किया है. हालांकि, उम्मीद के मुताबिक ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई है. इसमें आयुष्मान खुराना के अलावा जयदीप अहलावत ने काम किया है जिनकी एक्टिंग की खूब तारीफ हो रही है.

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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