उत्तर प्रदेश

मोदी ने अपने रोड शो के जरिये रविवार शाम तक शहर के ज्यादातर शहरी हिस्सों में अपनी मौजूदगी का अहसास कराने की कोशिश की

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को वाराणसी लोकसभा क्षेत्र के जिन इलाकों का दौरा करेंगे, उनमें सबकी नजर खासतौर पर गढ़वा आश्रम पर होगी। यह आश्रम वाराणसी शहर के बाहरी छोर पर है। इस आश्रम के अनुयायियों में समाज के अलग-अलग तबकों के लोग शामिल हैं। हालांकि इनमें ओबीसी समुदाय के लोग ज्यादा है। लिहाजा यहां पहले भी अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के राजनीतिक दिग्गज आते रहे हैं।

वाराणसी की रोहनिया विधानसभा सीट से जुड़े गोबर्द्धनुपर, कैरेया और मदरवां जैसे गांव आश्रम के करीब हैं। मोदी ने अपने रोड शो के जरिये रविवार शाम तक शहर के ज्यादातर शहरी हिस्सों में अपनी मौजूदगी का अहसास कराने की कोशिश की। पीयूष गोयल, स्मृति इरानी और महेश शर्मा समेत बीजेपी के टॉप नेता शहर के अलग-अलग हिस्सों में वोटरों के बीच पहुंचे। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यहां ट्रेडर्स से बात की, वहीं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हाल में शहर में प्रवास के दौरान स्थानीय वकीलों से बात की थी। इससे साफ है कि बीजेपी की चिंता 5 विधानसभा सीटों पर को लेकर है, जिनमें वाराणसी साउथ, वाराणसी कैंट, वाराणसी (नॉर्थ), रोहनिया और सेवापुरी शामिल हैं। ये सीटें मोदी की वाराणसी लोकसभा सीट में आती हैं। इनमें से किसी भी सीट पर बीजेपी को नुकसान होने की सूरत में विपक्षी पार्टियों को सीधा प्रधानमंत्री पर निशाना साधने का मौका मिल जाएगा। वाराणसी में 8 मार्च को मतदान होना है।

वाराणसी साउथ
इस सीट पर अपनी संभावनाओं को कायम रखने के लिए मोदी बीते शनिवार को काशी विश्वनाथ मंदिर के अपने दौरे में श्यामदेव राय चौधरी के साथ नजर आए थे। चौधरी टिकट नहीं मिलने से रूठे हुए थे, जबकि 1989 से वह यहां कभी नहीं हारे थे। शहर में ‘दादा’ के रूप में जाने वाले चौधरी को लेकर वोटरों के मन में काफी सम्मान है। इस बार बीजेपी ने नीलकंठ तिवारी को यहां उम्मीदवार बनाया है। उनके खिलाफ वाराणसी के पूर्व सांसद राजेश मिश्रा कांग्रेस कैंडिडेट हैं।

वाराणसी कैंट
यह सीट भी पिछले तीन दशकों से बीजेपी का गढ़ रही है। 2012 से पहले इस सीट पर हरिश्चंद्र श्रीवास्तव जीतते रहे थे। 2012 में उनकी पत्नी ज्योत्सना जीतीं। अब उनके बेटे सौरभ बीजेपी से इस सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस-समाजवादी पार्टी गठबंधन ने पूर्व विधायक अनिल श्रीवास्तव को उतारा है। यहां मुस्लिम वोटरों की अच्छी तादाद है।

वाराणसी नॉर्थ
इस सीट पर भी 2012 में बीजेपी उम्मीदवार रवींद्र जायसवाल ने जीत हासिल की थी। वह फिर से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। बीएसपी ने यहां सुजीत मौर्य को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस-समाजवादी पार्टी गठबंधन के उम्मदीवार अब्दुल समद अंसारी हैं। यहां भी मुसलमानों की बड़ी आबादी है।

रोहनिया
यहां पटेल वोटरों की बड़ी मौजूदगी के कारण यह सीट बीजेपी की सहयोगी पार्टी अपना दल की नेता और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और उनकी मां कृष्णा पटेल के बीच राजनीतिक लड़ाई का अखाड़ा बन गई है। कृष्णा अपना दल के अपने गुट की नॉमिनी के तौर पर यहां से चुनाव लड़ रही है। बीजेपी-अपना दल (अनुप्रिया गुट) ने यहां से सुरेंद्र नारायण ओधे को उतारा है।

सेवापुरी
समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार और पार्टी का पटेल चेहरा सुरेंद्र पटेल चौथी बार विधानसभा में एंट्री के लिए यहां से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। बीजेपी-अपना दल की उम्मीदवार नीलरतन पटेल उर्फ नीलू है। बीएसपी ने यहां से ब्राह्मण उम्मीदवार महेंद्र पांडे को उतारकर बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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