टैकनोलजी

Apple लेकर आया अपनी नई मैसेजिंग सर्विस, बिना इंटरनेट के भेज सकेंगे फोटो और वीडियो

Apple New Messaging Service: आज के समय में इंटरनेट के बिना हमारा एक दिन भी नहीं कट सकता. इंटरनेट ने हमारे ऊपर अपना पूरा दबदबा बनाकर रखा हुआ है. इंटरनेट ने लोगों को अपनी बहुत बुरी आदत लगा दी है. बिना इंटरनेट का यूज किए हुए हम एक फोटो भी किसी को शेयर नहीं कर सकते हैं. इसी चीज को खत्म करने के लिए एप्पल एक ऐसी सर्विस पर काम कर रहा है. जिससे बिना इंटरनेट के आप फोटो, वीडियो और मैसेज किसी को भी भेज सकेंगे.

एप्पल ने अपनी रिच कम्यूनिकेशन सर्विस (RCS)मैसेजिंग का ऐलान किया है. इस मैसेजिंग सर्विस की मदद से आप बिना इंटरनेट के भी फोटो, वीडियो और मैसेज शेयर कर सकेंगे. एप्पल की ये मैसेजिंग सर्विस गूगल और वॉट्सऐप के लिए परेशानी का सबब बन सकती है. इसकी मदद से एप्पल के iMessage से एंड्रॉइड बेस्ड गूगल के इनबॉक्स में मैसेज भी भेजा जा सकेगा.

कैसे काम करेगा RCS

एप्पल की ये सर्विस एक इंटरैक्टिव मैसेजिंग प्रोटोकॉल है. जिसकी वजह से यूजर्स टू वे कम्यूनिकेशन का मजा ले सकेंगे. इसके अलावा यूजर्स पिक्चर और वीडियो तो शेयर करेंगे ही इसके साथ ही में ग्रुप कन्वर्सेशन भी कर पाएंगे. रिच कम्यूनिकेशन सर्विस में ट्रेडिशनल मैसेजिंग की सुविधा के साथ अन्य कई सुविधा मिलेगी.

एप्पल ने 2008 में ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल एसोसिएशन प्रोटोकॉल (GSMA) किया था. इस सुविधा से SMS कम्यूनिकेशन को टेलिकॉम और मोबाइल डिवाइस के बीच कम्यूनिकेट करा जा सकेगा. इसके अलावा फाइल ट्रांसफर, ऑडियो मैसेजिंग, वीडियो शेयर, ग्रुप चैट, एनरिच कॉलिंग, लाइव स्केचिंग, लोकेशन शेयरिंग और भी कई सारी सुविधाओं का लाभ यूनिवर्सल प्रोटोकॉल की मदद से उठा सकेंगे.

एंड्रॉइड यूजर्स भी ले सकेंगे सर्विस 

एप्पल की इस मैसेजिंग सर्विस का इस्तेमाल आईफोन यूजर्स के अलावा एंड्रॉइड यूजर्स भी कर सकेंगे. एप्पल एंड्रॉयड के लिए भी रोल आउट किया जा रहा है. पहले ये सिर्फ आईफोन यूजर्स के लिए दिया गया था, जहां आईपी मैसेज की मदद से यूजर्स कम्यूनिकेट कर पाते थे. जबकि ब्लू बबल में दिखता था. वहीं एंड्रॉइड में ग्रीन बबल दिखेगा.

ये भी पढ़ें-

अरे वाह! चैटिंग करना हुआ बेहद आसान, स्मार्ट वॉच में भी चला सकेंगे WhatsApp

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button