उत्तर प्रदेश

आंवला लोकसभा सीट: BJP की जीत में रोड़ा बन सकता है SP-BSP गठबंधन! बसपा की संभावित प्रत्याशी रुचि वीरा जी की जीत निश्चित

असलम खान ( मुख्य सम्पादक ):उत्तर प्रदेश की आंवला लोकसभा सीट पर अभी भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है. अभी तक यहां हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 5 बार चुनाव जीती है. अब एक बार फिर बीजेपी के सामने 2019 में कमल खिलाने की चुनौती है. BJP के धर्मेंद्र कुमार कश्यप पिछले चुनाव में 40 फीसदी से अधिक वोट पाकर अव्वल रहे थे. रुहेलखंड का हिस्सा आंवला में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन के बाद मुकाबला और भी कड़ा हो गया है.

BSP उम्मीदवार कुंवररानी रुचि वीरा

आंवला लोकसभा सीट का इतिहास इस सीट पर 1962 में पहली बार चुनाव हुए थे और सभी को चौंकाते हुए हिंदू महासभा ने जीत दर्ज की थी. हालांकि, उसके बाद 1967, 1971 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी बड़े अंतर के साथ यहां से विजयी रही. 1977 के चुनाव में चली सत्ता विरोधी लहर का असर यहां भी दिखा और भारतीय लोकदल ने जीत दर्ज की, 1980 में भी कांग्रेस को यहां से जीत नहीं मिल सकी और जनता पार्टी यहां से विजयी हुई. 1984 में कांग्रेस बड़े अंतर से यहां जीती.1984 के बाद से ही यहां कांग्रेस वापसी को तरस रही है. 1989 और 1991 में भारतीय जनता पार्टी लगातार दो बार यहां से जीती. 1996 के चुनाव में बीजेपी को यहां झटका लगा और क्षेत्रीय दल समाजवादी पार्टी विजय होकर सामने आई. लेकिन दो साल बाद हुए 1998 के चुनाव में एक बार फिर बीजेपी यहां जीती. 1999 का चुनाव समाजवादी पार्टी के हक में गया, लेकिन 2004 में जनता दल (यू) के टिकट पर सर्वराज सिंह यहां से संसद पहुंचे.
पिछले दो चुनाव में बीजेपी का इस सीट पर कब्जा है, 2009 का चुनाव मेनका गांधी ने यहां से बड़े अंतर से जीता. और 2014 में इस सीट पर बीजेपी को मोदी लहर का फायदा मिला और धर्मेंद्र कुमार कश्यप एकतरफा लड़ाई में जीते.
आंवला लोकसभा सीट का समीकरण
बरेली जिले में आने वाला आंवला लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम वोटरों का खासा प्रभाव है. जिले में करीब 35 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं, जबकि 65 फीसदी संख्या हिंदुओं की है. बीते काफी समय से यहां मुस्लिम-दलित वोटरों का समीकरण नतीजे तय करता आया है, इनके अलावा क्षत्रीय-कश्यप वोटरों का भी यहां खासा प्रभाव है. ऐसे में इस बार समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन होने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है.
2014 के आंकड़ों के अनुसार, यहां करीब 17 लाख वोटर थे. इनमें करीब 9 लाख पुरुष और 7.5 लाख महिला मतदाता थे. आंवला लोकसभा क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें शेखपुर, दातागंज, फरीदपुर, बिथरीचैनपुर और आंवला विधानसभा सीटें आती हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में इनमें से यहां सभी सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी.
2014 में कैसा रहा था जनादेश
पिछले चुनाव में यहां करीब 60 फीसदी मतदान हुआ था. भारतीय जनता पार्टी को मोदी लहर का फायदा मिला और बीजेपी प्रत्याशी धर्मेंद्र कुमार कश्यप ने 24 फीसदी वोट पाकर जीत दर्ज की. समाजवादी पार्टी के कुंवर सर्वराज को सिर्फ 16% वोट हासिल हुए थे और बसपा की सुनीता शाक्य को 11% वोट मिले थे।

पूर्व सांसद
मेनका गांधी-बीजेपी2009

कुंवर सर्वराज सिंह-जेडीयू 2004

कुंवर सर्वराज सिंह-सपा1999

राजवीर सिंह-बीजेपी1998

कुंवर सर्वराज सिंह-सपा1996

राजवीर सिंह-बीजेपी1991

राज वीर सिंह-बीजेपी1989

कल्याण सिंह सोलंकी-कांग्रेस1984

जयपाल सिंह कश्यप-जनता पार्टी एस 1980

बृजराज सिंह-बीएलडी1977

सावित्री श्‍याम-कांग्रेस1971

एस श्याम-कांग्रेस1967

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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