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ऐश्वर्या राय बच्चन बेटी आराध्या संग मुंबई वापस लौटी, देखें वीडियो

बॉलीवुड एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन इन दिनों सुर्खियों में बनी हुई हैं। हाल ही में ऐश्वर्या राय बच्चन कांस फिल्म फेस्टिवल में शामिस हुई थीं, जहां उन्होंने अपना जलवा बिखेरा था। इस फेस्टिवल में ऐश्वर्या राय बच्चन के 2 लुक्स सामने आए थे, जिसे लोगों ने काफी पसंद किया था। अब कांस फिल्म फेस्टिवल में धमाल मचाने के बाद ऐश्वर्या राय बच्चन मंबई वापस लौट गई हैं। ऐश्वर्या का एक वीडियो सामने आया है, जो कि सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। ऐश्वर्या का ये क्लिप देख उनके फैंस खुशी से खिलाखिला उठे हैं। आइए नजर डालते हैं इस वीडियो पर…

मुंबई वापस लौटी ऐश्वर्या राय बच्चन

बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन ने कांस फिल्म फेस्टिवल में अपना ग्लैमर का तड़का लगाया था। उनका हर एक लुक इंटरनेट पर आते ही छा गया है। अब ऐश्वर्या राय बच्चन अपनी बेटी आराध्या के साथ मुंबई वापस लौट गई हैं। इस दौरान का वीडियो विरल भियानी ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है, जो कि काफी ट्रेंड कर रहा है। सामने आए इस वीडियो में ऐश्वर्या राय बच्चन और आराध्या कैमरे के सामने देखते नजर आ रहे हैं। इस दौरान ऐश्वर्या राय ने तो पैप्स को पोज भी दिए हैं। इस क्लिप पर लोग जमकर कमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, ‘स्वागत है आपका’ Also Read – Cannes 2024: ऐश्वर्या राय बच्चन ने गाउन पहन ढाया कहर, नया लुक देख फैंस ने कहा- ‘क्या ब्यूटी है यार’

यहां देखें ऐश्वर्या राय बच्चन का वीडियो:

कांस फिल्म फेस्टिवल में छाई हुई हैं कियारा आडवाणी

मालूम हो कि ऐश्वर्या राय बच्चन के जाने के बाद अब कियारा आडवाणी कांस फिल्म फेस्टिवल में छाई हुई हैं। कियारा आडवाणी ने पिंक-ब्लैक गाउन में अपना किलर अंदाज दिखाया है। कियारा आडवाणी की हर अदा पर लोग फिदा हो गए हैं। कियारा आडवाणी हर एक लुक इंटरनेट पर धड़ल्ले से वायरल हो रहा है। Also Read – Cannes 2024: ऐश्वर्या राय बच्चन ने टूटे हाथ के साथ रेड कार्पेट पर दिखाईं ऐसी अदाएं, तस्वीरें देख लोग बोले- ‘चांद पर कोई…’

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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