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पालघर के बाद उत्तरप्रदेश में 2 साधुओं की गला काटकर हत्या, जानिए किसने क्यों मारा

राजेश तिवारी विशेष संवाददाता लखनऊ:पालघर के बाद यूपी के बुलंदशहर में 2 साधुओं की गला काटकर हत्या का मामला सामने आया है. घटना अनूपशहर कोतवाली क्षेत्र के पगोना गांव की है.

बुलंदशहर: महाराष्ट्र के पालघर (Palghar) के बाद यूपी के बुलंदशहर में 2 साधुओं की गला काटकर हत्या का मामला सामने आया है. मंदिर परिसर में स्थित कमरे में दोनों साधुओं के शव खून से लथपथ पड़े मिले. घटना अनूपशहर कोतवाली क्षेत्र के पगोना गांव की है.
पुलिस ने शक के आधार पर गांव के एक युवक को हिरासत में लिया है. युवक अपराधी किस्म का बताया जा रहा है. युवक और साधुओं के बीच कल किसी बात को लेकर कहासुनी हुई थी.
घटना के बाद बुलंदशहर एसएसपी समेत पुलिस के तमाम आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटना की बारीकी से जांच की. पुलिस की प्रथम जांच में इस हत्या में गांव के ही नशेड़ी युवक मुरारी का नाम सामने आया है.

बुलंदशहर पुलिस का दावा है कि हिरासत में लिया गया मुरारी, लंबे समय से भांग का नशा करता है. आरोपी पर दो दिन पहले बाबा का चिमटा चुराने का भी आरोप लगा था. आरोप है कि इसी बात को लेकर मृतक साधुओं और आरोपी मुरारी के बीच कहासुनी हो गई थी, जिसमें आरोपी मुरारी ने दोनों साधुओं को अंजाम भुगत लेने की धमकी दी थी.

पुलिस अधिकारियों का दावा है कि आरोपी पुलिस हिरासत में है और आरोपी अभी भी नशे की हालत में है. फिलहाल दोनों संतों के शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है, जबकि घटना स्थल की फॉरेन्सिक जांच भी कराई जा चुकी है. बुलंदशहर पुलिस के आला अधिकारी आरोपी मुरारी से पूछताछ में जुटे हैं.
इस मामले में एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने कहा, ‘दो बाबा एक मंदिर में रहते थे. मुरारी नाम का एक शख्स इस मंदिर में आया-जाया करता था. मुरारी भांग का नशा करता था. 3-4 दिनों पहले मुरारी ने बाबा का चिमटा गायब कर दिया था. उसके बाद बाबा ने उसे डांटा था. इसी वजह से आज सुबह किसी समय तलवार से मुरारी ने बाबा की हत्या कर दी. गांववालों ने इसे तलवार लेकर गांव से बाहर जाते देखा था. उसी आधार पर मुरारी की तलाश की गई. मुरारी गांव से 2 किलोमीटर दूर मिला. फिलहाल ये नशे में है और अर्धनग्न अवस्था में है. मुरारी को गिरफ्तार कर लिया गया है.’

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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