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Phone Hacking: फोन में दिखे ये 8 संकेत, तो समझ जाएं हो रही है आपके फोन की जासूसी!

How to Protect Your Phone From Hacking: इंटरनेट के बढ़ते उपयोग की वजह से फोन हैकिंग की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं. फोन को हैक करने के लिए हैकर्स तरह तरह के उपाय निकलते हैं. ऐसे में लोगों को जागरूक रहने की बेहद जरूरत है. लेकिन आप कैसे पता लगा सकते हैं कि आपका फोन हैक हो गया है? आज हम आपको ऐसे टिप्स बताएंगे, जिससे आप पता लगा सकते हैं कि कहीं आपका फोन हैक तो नहीं हो गया है. 

अगर आपका फोन जल्द डिस्चार्ज हो रहा है तो हो सकता है कि आपका फोन हैक हो गया हो, क्योंकि कई बार बैकग्राउंड में जासूसी ऐप्स चलने की वजह से फोन की बैटरी जल्दी डिस्चार्ज हो जाती है. ऐसे में इस ओर ध्यान देने की जरूरत है. 

बिना मतलब के ऐप्स को फोन में ना रखें

ये ध्यान रखने की जरूरत है कि आपके फोन में ऐसे ऐप्स ना हों, जिसको आप यूज नहीं करते हों. कई बार आपकी इजाजत के कोई ऐप इंस्टॉल हो जाता है, ऐसे में इसे हटाना बेहद जरूरी है. ये फोन हैकिंग का एक कारण बन सकता है. इन अनजान ऐप्स में जासूसी सॉफ्टवेयर छिपे हो सकते हैं. 

डिवाइस जल्दी गर्म होने से भी खतरा

अगर आपका डिवाइस जल्दी गर्म हो रहा है तो ऐसा मुमकिन है कि जासूस रियल टाइम में डिवाइस लोकेशन ट्रैक कर रहे हों. इसके लिए वे जीपीएस सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में फोन के हार्डवेयर पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ता है. 

फोन में हो सकती है ये भी दिक्कत

फोन हैक होने की स्थिति में आपके डिवाइस में खराबी जैसे स्क्रीन फ्लैशिंग, ऑटोमेटिक फोन सेटिंग चेंज, या फोन काम न करना जैसी चीजें हो सकती हैं. 

कॉलिंग के दौरान सुनाई दे ऐसी चीजें

अगर आपके फोन में कॉलिंग के दौरान किसी भी तरह का बैकग्राउंड न्वॉइज सुनाई दे, तो सतर्क हो जाएं. ये हैकिंग के संकेत हो सकते हैं. 

डिवाइस के ब्राउजिंग हिस्ट्री को भी करें चेक

 आपने डिवाइस के ब्राउजिंग हिस्ट्री को भी चेक कर सकते हैं. कई बार जासूस एप्लिकेशन डाउनलोड कर आपके फोन पर कब्जा कर सकते हैं.

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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