टैकनोलजी

आपके शहर में 5G सर्विस पहुंची या नहीं? ऐसे चेक करें, ये रही पूरी लिस्ट

5G Service in India: देश 5G नेटवर्क की शुरुआत लगभग दो महीने पहले ही हो चुकी है. अब तक टेलिकॉम कंपनियां 5G नेटवर्क को देश के 14 राज्यों और 50 शहरों तक पहुंचाने में कामयाब रहीं है, साथ ही BSNL भी जल्द 5G सर्विस लॉन्च करने वाला है. आइये हम आपको बताते हैं किन किन शहरों में 5G नेटवर्क की सुविधा पहुंच चुकी है.

सरकार ने दी जानकारी

भारत सरकार में संचार राज्य मंत्री, देवुसिंह चौहान द्वारा राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी गयी जानकारी के मुताबिक, टेलिकॉम कंपनियां एक अक्टूबर 2022 से 26 नवंबर तक 14 राज्यों (केंद्र शासित प्रदेशों सहित) के 50 शहरों में हाई स्पीड 5G सर्विस को पहुंचाने में कामयाब रहीं हैं.

बीएसएनएल 5G

News Reels

भारत सरकार में केंद्रीय मंत्री, अश्वनी वैष्णव ने एक कार्यक्रम में जानकारी देते हुए बताया कि, BSNL भी टाटा कंसलटेंसी सर्विस के साथ मिलकर 5G सर्विस को जल्द शुरू करने के लिए मिलकर काम करेगा. जिसके लिए पूरे देश में लगभग 1.35 लाख टावर लगाने का काम 5 से 7 महीने पूरा कर लिए जाने की उम्मीद है.

रिलायंस जियो 5G सर्विस वाले शहर

रिलायंस जियो ने जिन शहरों में अपनी 5G सर्विस शुरू कर दी हैं, उन शहरों में दिल्ली एनसीआर, मुंबई, वाराणसी, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, नाथद्वार, पुणे, गुरुग्राम, नॉएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद  और गुजरात के सभी 33 जिला मुख्यालय भी शामिल है. जियो देश में 5G सर्विस उपलब्ध कराने में एयरटेल से आगे है.

एयरटेल 5G सर्विस वाले शहर

वहीं जियो से मुकाबला करते हुए, टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर कंपनी एयरटेल भी लगातार अपने 5G नेटवर्क का दायरा बढ़ाने में लगी हुई है. एयरटेल अब तक देश के बड़े तमाम बड़े शहरों में 5G सर्विस की शुरुआत कर चुकी है. जिनमें दिल्ली, सिलीगुड़ी, बेंगलुरु, हैदराबाद, वाराणसी, मुंबई, नागपुर, चेन्नई, गुरुग्राम, पानीपत, गुवाहाटी और पटना जैसे शहर शामिल हैं.

यह भी पढ़ें : स्मार्टफोन का ये Hole है बड़े काम का! ना होने पर यूजर्स को उठानी पड़ेंगी काफी परेशानियां

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button