उत्तर प्रदेश

UP चुनाव: ​BJP ने जारी की 155 कैंडिडेट्स की दूसरी लिस्ट, राजनाथ के बेटे को टिकट

बीजेपी कैंडिडेट्स की दूसरी लिस्ट जारी करते केशव प्रसाद मौर्य और अरुण सिंह
बीजेपी कैंडिडेट्स की दूसरी लिस्ट जारी करते केशव प्रसाद मौर्य और अरुण सिंह

नई दिल्ली
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और उत्तर प्रदेश के पार्टी प्रमुख केशव प्रसाद मौर्य ने रविवार को दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने इसमें भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश चुनाव में उतरने वाले कैंडिडेट्स की दूसरी लिस्ट जारी की है। इसमें 155 कैंडिडेट्स के नामों की घोषणा हुई। इससे पहले जारी की गई पार्टी की लिस्ट में 149 कैंडिडेट्स के नामों की घोषणा हुई थी।बीजेपी की दूसरी लिस्ट में गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को भी टिकट मिला है। उनको पार्टी ने नोएडा विधानसभा से उम्मीदवार बनाया है। इस लिस्ट में कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुईं रीता बहुगुणा जोशी को भी टिकट दिया गया है। वह लखनऊ कैंट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी।

गरिमा सिंह को अमेठी से, सिद्धार्थनाथ सिंह को इलाहाबाद पश्चिम तो इलाहाबाद दक्षिण से नंद कुमार को टिकट मिला है। इसमें अतरौली से कल्याण सिंह की बहू प्रेमलता सिंह को टिकट मिला है।पार्टी ने कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाली रायबरेली सीट से अनीता श्रीवास्ताव, भगवन्त नगर से हृदयनारायण दीक्षित, मुलायम के गढ़ माने जाने वाले इटावा से सरिता भदौरिया को टिकट दिया है। हरदोई से राजाबख्श सिंह, शाहाबाद से रजनी तिवारी, सांडी से प्रभाष वर्मा, लखनऊ मध्य से बृजेश पाठक, मिश्रिख से रामकृष्ण भार्गव, संडीला से राजकुमार अग्रवाल को ​भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है।
इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश सरकार पर आरोप लगाया कि उनके काल में कानून व्यवस्था ध्वस्त हुई है। उन्होंने अखिलेश यादव पर उत्तर प्रदेश को बर्बाद करने का आरोप लगाया।

 

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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