उत्तर प्रदेश

UP के कुशीनगर में ट्रैन से टकराई स्कूल वैन। 13 बच्चों की मौत

उत्तर प्रदेश: गुरुवार को सुबह 7 बजे उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के दुधी रेलवे स्टेशन के पास एक मानव रहित क्रॉसिंग में 20 बच्चों को लेकर एक वैन वाला ट्रैन की चपेट में आ गया, जिसमें कम से कम 13 बच्चो की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए थे।

इस दुर्घटना में 8 से 10 साल के आयु वर्ग के तेरह छात्रों की मौत हो गई थी, जबकि कम से कम चार गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जब उनकी स्कूल वैन को एक मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग में गोरखपुर से चलने वाली ट्रेन ने टक्कर मारी ।

सूत्रों के मुताबिक, बच्चों में से एक ने खुलासा किया कि चालक ने इयरफ़ोन लगाए थे जिसके कारण वह आने वाली ट्रेन नहीं सुन सका।

गोरखपुर आयुक्त के तहत हुई घटना की जांच के आदेश पर आदित्यनाथ ने कहा, “दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी”।

एक बयान में उत्तर पूर्वी रेलवे, गोरखपुर के जन सूचना अधिकारी संजय यादव ने कहा: ” ट्रेन सुबह 7 बजे टाटा मैजिक से टकराई जब वैन ड्राइवर स्कूल के बच्चो को लेकर रेलवे क्रोसिग्न पार कर रहा था। ट्रेन चालक ने दुदाही स्टेशन को सूचित किया। गेट मित्र अरविंद भारती यूएमएलसी में उपलब्ध थे और टाटा मैजिक को रोकने की कोशिश की लेकिन वाहन चालक नहीं रुका। ”

आदित्यनाथ ने कुशीनगर में दुर्घटना स्थल का दौरा किया और पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने मृतकों के परिवारों के लिए 2 लाख रुपये का अनुग्रह की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने दुर्घटना के सिलसिले में रेल मंत्री पियुष गोयल से बात की है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुशीनगर में गुरुवार की सुबह दुर्घटना में कम से कम तेरह स्कूल के बच्चों की मौत हो गई थी, जो वैन चालक की गलती के कारण हुई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्घटना होने पर ड्राइवर के पास इयरफ़ोन भी थे और उनके उम्र में भी सवाल हैं। नियम हैं, पूछताछ की जाएगी कि उनका पालन क्यों नहीं किया गया। सख्त कार्रवाई की जाएगी, “मुख्यमंत्री ने कहा।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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